नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ललन सिंह ने जैसलमेर में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार की परामर्शदात्री समिति (Consultative Committee) ृकी बैठक में शामिल हुए. बैठक के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत ऊंटों को शामिल करने की बात दोहराई और ऊंट आधारित आजीविका को बढ़ाने के लिए डीएएचडी, राजस्थान और गुजरात सरकारों और आईसीएआर-एनआरसी के बीच बेहतर समन्वय बनाने की बात कही. उन्होंने आरसीडीएफ (सरस जयपुर डेयरी) की उपलब्धियों पर बात की और सरस पत्रिका- 1 वर्ष कीर्तिमान, श्वेत क्रांति 2.0 का भी विमोचन किया.
बैठक के दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) और ऊंट नस्ल संरक्षण सहित प्रमुख पहलों की समीक्षा की गई. जहां केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी. सिंह बघेल, मंत्री जॉर्ज कुरियन, राजस्थान के मंत्री जोराराम कुमावत, नरेश पाल गंगवार, सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग, एफएएचडी मंत्रालय भारत सरकार शामिल रहे. एनडीडीबी का प्रतिनिधित्व कार्यकारी निदेशक एस. रघुपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया.
जानें क्या बड़ी बातें कहीं
ललन सिंह ने दूध खरीद और प्रोसेसिंग को मजबूत करने, सहकारी समितियों और एमपीओ के माध्यम से संगठित डेयरी क्षेत्र का विस्तार करने की बात कही.
उन्होंने किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण दूध की आपूर्ति और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने पर एनपीडीडी के फोकस पर प्रकाश डाला.
उन्होंने वाराणसी दूध संघ के पुनरुद्धार के लिए एनडीडीबी के प्रयासों की सराहना की, जिसने खरीद को 18,000 एलपीडी से बढ़ाकर 3.0 एलएलपीडी कर दिया है.
वहीं सहकारी-नेतृत्व वाले विकास में तेजी लाने के लिए राज्य सहकारी समितियों के साथ एनडीडीबी के समझौता ज्ञापनों की भी प्रशंसा की और कहा कि जैसे-जैसे भारत एफएमडी-मुक्त स्थिति के करीब पहुंचेगा, दूध निर्यात में वृद्धि होगी.
इस दौरान एनपीडीडी के मिशन, उद्देश्यों और प्रगति पर प्रस्तुति दी और भारतीय ऊँट पालन के परिदृश्य, चुनौतियों और आगे के रास्ते पर भी अधिकारियों ने प्रकाश डाला गया.












