Home मछली पालन Fish Farming: फरवरी में 15 दिन पर तालाब में चलाएं जाल, खाद का इस्तेमाल एक्सपर्ट की सलाह पर करें
मछली पालन

Fish Farming: फरवरी में 15 दिन पर तालाब में चलाएं जाल, खाद का इस्तेमाल एक्सपर्ट की सलाह पर करें

Interim Budget 2024
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन के काम में अगर अच्छी ग्रोथ और उत्पादन हासिल करना है तो फिर मौसम के हिसाब से भी मछलियों की केयर करना पड़ेगा. नहीं तो मछली पालन के काम में नुकसान उठाना पड़ सकता है. मछली पालन के काम में हर छोटी बड़ी बातों का ध्यान देना जरूरी होता है. जैसे अब फरवरी का महीना शुरू हो गया है. जनवरी जैसी ठंड फरवरी में नहीं पड़ेगी. इसलिए मछलियों की देखभाल अलग तरह से की जाती है. एक्सपर्ट का कहना है कि फीड देने से लेकर, तालाब प्रबंधन में भी बदलाव करने की जरूरत होती है.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को अहम जानकारी दी गई है. जिसके तहत फरवरी के महीने में में क्या करना चाहिए क्या नहीं, इस बारे में डिटेल से बताया गया है. अगर आप भी जानना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट को पढ़ें.

क्या करें, जानें यहां
मछली बीज उत्पादक कॉमन कार्प बीज का उत्पादन हैचरी अथवा तालाब में ही हॉपा विधि से शुरू कर दें.

तालाब में हर 15 दिन के गैप पर जाल चलवाएं पंगेशियस मछली वाले तालाब में जाल नहीं चलवाना चाहिए.

फरवरी के महीने में स्पलीमेंट फीड का इस्तेमाल पानी के तापमान के बढ़ते क्रम में बढ़ाते रहना चाहिए.

जैविक एवं रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल एक्सपर्ट सलाह के बिना कतई न भी न करें.

पानी का रंग ज्यादा हरा होने पर उर्वरक और चूना का इस्तेमाल बंद कर दें.

तालाब के पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोटेशियम परमैंगनेट 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से डालें.

या फिर नमक 40-50 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करें. इससे पानी की गुणवत्ता ठीक हो जाएगी.

तालाब के पानी के पीएच की नियमित जांच अवश्य करें. पीएच की जांच सुबह 5-6 बजे तथा दोपहर 2 बजे यानि दो बार प्रतिदिन करें.

सदाबहार तालाब में चूना का प्रयोग औसतन 50 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से करें.

मत्स्य अंगुलिकाओं का ट्रांसफर सदाबहार तालाब में करें. तालाब में जलीय पौधों की नियमित सफाई करते रहना चाहिए.

पानी का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाये तब मत्स्य बीज संचयन का काम शुरू करना चाहिए.

निष्कर्ष
यदि ये काम कर ले गए तो फिर मछली पालन के काम में नुकसान नहीं होगा. इससे मछलियों की ग्रोथ बेहतर हो जाएगी और मछली पालन में फायदा मिलेगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming Tips: चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और नमक तालाब में डालें, इसके हैं कई फायदे

नई दिल्ली. मछलि यों के तालाब में चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming: फिशरीज से जुड़े लोगों में सात थ्री-व्हीलर, आइस बॉक्स और नावों का किया वितरण

नई दिल्ली. बिहार के औरंगाबाद शहर में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन...

फिश एक्वेरियम की मछलियां बेहद ही संवेदनशील होती हैं.
मछली पालन

Ornamental Fish: महाराष्ट्र के एक सजावटी फिश ब्रूड बैंक से अमेरिका समेत 12 देशों में हो रहा एक्सपोर्ट

बनई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के...