नई दिल्ली. पशुपालन में दूध उत्पादन से ही सबसे ज्यादा कमाई पशुपालकों की होती है. पशु अगर अपनी क्षमता के मुताबिक दूध का उत्पादन करता रहता है, तो इससे पशुपालक को फायदा होता रहता है. दूसरी ओर लापरवाही करने से दूध उत्पादन में कमी हो जाती है. या पशु को किसी तरह की बीमारी हो जाती है तो इसके चलते भी पशुपालन के काम में नुकसान होता है. इसलिए बेहद जरूरी है कि पशु अपनी क्षमता के मुताबिक दूध का उत्पादन करता रहे और उसे किसी तरह की कोई बीमारी भी ना हो तभी डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में लगातार मुनाफा मिलता रहेगा.
डेयरी एक्सपर्ट कहते हैं कि पशु का दूध उत्पादन कम होना सिर्फ पोषक तत्वों की कमी या बीमारी से ही नहीं होता है. बल्कि कई बार दूध दुहने का सही वक्त और सही तरीका भी ना पता होने की चलते दूध उत्पादन में कमी देखी जाती है. साथ ही दूध की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. जबकि इससे पशु के स्वास्थ्य पर भी बेहद ही बुरा असर पड़ता है.
क्या है सही वक्त और सही तरीका
एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर दिन में दो बार दूध निकाला जाए तो इससे दूध की कुल मात्रा बढ़ती है. जबकि लगातार एक ही समय में निकलने से पशु की आदत दूध उत्पादन की बनी रहती है.
बार-बार अगर समय बदल जाए तो इससे पशु परेशान होते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक सुबह 5 से 6 बजे और शाम में 5 से 6 बजे दूध निकालने का सही वक्त माना जाता है.
बता दें कि दूध उत्पादन के बाद थन की मांसपेशियों को बंद होने में तकरीबन 30 मिनट का समय लग जाता है. ऐसे समय में पशु को लेटने से रोकना चाहिए. जिससे थनैला रोग नहीं होता है.
अगर आप समय से दूध निकालते हैं तो इससे दूध में गंदगी या बैक्टीरिया के प्रवेश की संभावना भी कम हो जाती है. जबकि पशु को बेचैनी आदि भी नहीं होती है.
मशीन से दूध निकाल रहे हैं तो बहुत देर तक मशीन नहीं लगाए रखना चाहिए. इससे थनों को नुकसान पहुंच सकता है.
दूध निकालने से पहले थनों को गुनगुने पानी से धो लेना फायदेमंद होता है, और उसे साफ कपड़े से पोछना भी चाहिए.
दूध निकालने के दौरान दो से तीन बार जमीन पर उसकी धार निकालनी चाहिए. साथ ही जहां पर दूध निकाला जा रहा है वहां वातावरण शांत भी होना चाहिए.












