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World Milk Day: आने वाले वर्षों में हर हाल में बढ़ाना होगा दूध उत्पादन, 2033 में 33 करोड़ टन की है जरूरत

कंकरेज नस्ल के मवेशी तथा जाफराबादी, नीली रावी, पंढरपुरी और बन्नी नस्ल की भैंसों को शामिल किया गया है. इसमें रोग मुक्त हाई जेनेटिक वाले सांडों को पंजाब सहित देश भर के वीर्य केंद्रों को उपलब्ध कराया जाता है.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भारत कई वर्षों से दूध उत्पादन में नंबर वन की पोजिशन पर काबिज है. आने वाले समय में देश के और आगे जाने की संभावना भी है. सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है कि देश को दूध उत्पादन के मामले में और ज्यादा आगे ले जाया जाए. इसके लिए प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. क्योंकि दूध उत्पादन में देश का यही पहलू सबसे कमजोर माना जा रहा है. अगर प्रति पशु दूध उत्पादन क्षमता बढ़ती है तो फिर दूध उत्पादन के मामले में भारत की बादशाहत सालों—साल कायम रहेगी. सरकार के निर्देश पर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB इस दिशा में कई काम कर रहा है. जिसका फायदा भी मिल रहा है.

नए आंकड़े कहते हैं कि भारत में हुए कुल 24 करोड़ टन दूध उत्पादन किया गया है. हालांकि इसे और ज्यादा बढ़ाने की जरूरत है. एक्सपर्ट के मुताबिक भारत की आबादी को देखते हुए देश को साल 2033 तक हर साल 33 करोड़ टन दूध उत्पादन की जरूरत है. दिक्कत ये है कि इसमें कई रुकाटें भी हैं लेकिन इन्हें दूर करने का भी प्रयास किया जा रहा है.

किए जा रहे हैं कई प्रयास
एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत के डेयरी क्षेत्र की ताकत को उसके अनोखे, छोटे किसानों पर आधारित ‘जन-उत्पादन’ (production by masses) मॉडल में है.

इस मॉडल में कम इनपुट और कम आउटपुट वाली प्रणालियां शामिल हैं, जिन्हें आज के समय में स्थिरता (sustainability) से जुड़ी चर्चाओं में वैश्विक स्तर पर काफी महत्व मिल रहा है.

आपको बता दें कि दूध की भारत की सबसे अधिक मूल्य वाली कृषि उपज के रूप में पहचान है.

सहकारी समितियां किसानों की समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

एनडीडीबी ‘विजन 2047’ के रोडमैप को देखा जाए तो इसमें पशु उत्पादकता में सुधार, संगठित डेयरी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाना जैसे काम शामिल है.

इसके अलावा मूल्य-वर्धित उत्पादों (value-added products) का हिस्सा बढ़ाना, वैश्विक डेयरी व्यापार में भारत की उपस्थिति को मजबूत करना और टिकाऊ डेयरी प्रथाओं को सुनिश्चित करना शामिल है.

डेयरी एक्सपर्ट के मुताबिक देश को साल 2033 तक हर साल 33 करोड़ टन दूध उत्पादन चाहिए और इस लक्ष्य को हासिल करने में रुकाटवों को दूर करना होगा.

रुकाटवों में चारे की बढ़ती लागत, कम होती चारा खेती की जमीन, पशुओं में उभरती नई और पुरानी बीमारियां भी हैं.

निष्कर्ष
देश में हजारों करोड़ों रुपए इस पर इन्वेस्ट किए जा रहे हैं. ताकि आने वाले भविष्य में भी भारत दुनिया में नंबर वन दूध उत्पादक देश बना रहे और इससे किसानों की आमदनी भी दोगुनी हो जाए.

Written by
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