नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग ऐसा काम है जिसको करने से स्वरोजगार भी मिलता है. जबकि इसे बड़े पैमाने पर किया जाए तो आप दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं. सरकार किसानों की इनकम बढ़ाना चाहती है. इस वजह से पोल्ट्री फार्मिंग जैसे कामों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. बात अगर उत्तर प्रदेश की ही कर लें तो राज्य में मुर्गी पालन को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार देने के लिए उत्तर प्रदेश कुक्कुट विकास नीति चल रही है. इसके तहत किसानों और उद्यमियों को 70 लाख रुपए तक का लोन 5 वर्षों के लिए दिया जाता है.
सबसे अच्छी बात तो यह है कि इसमें सात फीसद तक ब्याज सब्सिडी और 10 सालों तक मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं भी सरकार की ओर से मुहैया कराई जाती है. यदि आप पोल्ट्री फार्मिंग का काम करना चाहते हैं और बजट की वजह से अभी तक इस काम को नहीं कर सके हैं तो उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही कुक्कुट विकास नीति के तहत इसका लाभ ले सकते हैं. जिससे आपको अच्छा खासा मुनाफा कमाने का मौका मिल सकता है.
जानें योजना के बारे में
यदि आप कमर्शियल लेयर फार्म अंडा उत्पादन या ब्रॉयलर पैरेंट फॉर्म की स्थापना करते हैं तो बैंक से मिलने वाले लोन पर 5 सालों तक 7 फीसद की ब्याज छूट आपको मिलेगी.
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए मुर्गी पालन यूनिट के लिए बिजली बिल और कनेक्शन पर पशुधन विभाग द्वारा 10 साल तक 100 फीसद की बिजली छूट मिलती है.
वहीं फॉर्म को बनाने के लिए खरीदी गई या पट्टे पर ली गई जमीन के स्टांप शुल्क में भी 100 फीसद तक की छूट सरकार की ओर से उपलब्ध कराने की बात कही जाती है.
इस योजना के तहत फायदा उठाने के लिए आवेदक को उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है.
पोल्ट्री फार्म के लिए आवासीय औद्योगिक क्षेत्र से दूर पर्याप्त जमीन भी होनी चाहिए. रोजाना आप 10 हजार से लेकर 90 हजार अंडों के उत्पादन के लिए मुर्गियों को पाल सकते हैं.
आवेदन करने के लिए जरूरी दस्तावेजों में आधार कार्ड और पहचान पत्र निवास प्रमाण पत्र जमीन से जुड़े दस्तावेजों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता, पासबुक आदि देना होगा.
योजना का फायदा लेने के लिए उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं.
निष्कर्ष
पोल्ट्री फार्मिंग का काम इसलिए भी अच्छा है, क्योंकि अंडों और चिकन मीट की डिमांड सालभर बनी रहती है. अंडों की डिमांड सर्दियों में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. जबकि चिकन की डिमांड सालभर बनी रहती है. इसलिए इस काम में सफल होने का परसेंटेज ज्यादा है.












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