नई दिल्ली. पशुपालन का फायदा इस इसमें छिपा है कि पशु स्वस्थ रहे और ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करे. अगर ऐसा होता है तो फायदा ही फायदा होगा, जबकि ऐसा नहीं होता है तो नुकसान ही नुकसान होगा. इसलिए पशुपालन को ज्यादा फायदेमंद बनाने की कोशिश करने वाले तमाम एक्सपर्ट पशुओं के लिए प्रयास करते रहते हैं. डेयरी किसानों को समय—समय पर बीमारियों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. ताकि पशुपालक भाई किसी भी संभावित खतरे से खुद को बचा सकें. जिससे पशुपालन के काम में उन्हें ज्यादा फायदा हो सके.
इसी कड़ी में क्षेत्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (RRTC), तलवाड़ा ने कांडी क्षेत्र के गांवों में एक पशु कल्याण-सह-जागरूकता शिविर का आयोजन किया. जिसका उद्देश्य स्वच्छ दूध उत्पादन के तरीकों को बढ़ावा देना और दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य तथा उत्पादकता में सुधार करना था. यह कार्यक्रम RRTC, तलवाड़ा के निदेशक डॉ. आर.के. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया.
सामान्य बीमारियों से बचाव है जरूरी
डेयरी किसानों को वैज्ञानिक और स्वच्छ दूध उत्पादन के तरीकों, थन के स्वास्थ्य प्रबंधन, और उत्पादकता बढ़ाने तथा उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया.
दुधारू पशुओं में मैस्टाइटिस (थन-सूजन) का शीघ्र पता लगाने में मदद के लिए ‘कैलिफोर्निया मैस्टाइटिस टेस्ट’ (CMT) किट के उपयोग का एक व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया.
किसानों को मैस्टाइटिस से होने वाले आर्थिक नुकसानों और समय पर निदान तथा उपचार के लाभों के बारे में जानकारी दी गई.
डेयरी खेती में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, ग्रामीण महिला किसानों के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए.
इन सत्रों में स्वच्छ दूध निकालने की तकनीक, थन की देखभाल, स्वच्छ दूध प्रबंधन के तरीके और सामान्य बीमारियों से बचाव के उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया.
इन प्रयासों का उद्देश्य सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन के लिए उनके ज्ञान और कौशल को मजबूत करना था, साथ ही पशुओं के बेहतर कल्याण को भी सुनिश्चित करना था.
कुलपति डॉ. जे.पी.एस. गिल ने डेयरी-आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए स्वच्छ और सुरक्षित दूध उत्पादन, वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, और पशुपालन के उन्नत तरीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एस. ग्रेवाल ने डेयरी किसानों को वैज्ञानिक डेयरी पालन के तरीके अपनाने, दूध निकालने की स्वच्छ प्रक्रियाओं का पालन करने के बारे में बताया. ?
वहीं दूध की गुणवत्ता, पशुओं के स्वास्थ्य तथा फार्म के मुनाफे में सुधार के लिए बीमारियों का समय पर पता लगाने के उपायों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया.
इस शिविर का समन्वय पशु वैज्ञानिक डॉ. हुजाज तारिक और RRTC तलवाड़ा की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निहारिका ठाकुर ने किया.
इन दोनों ने किसानों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की और स्वच्छ दूध उत्पादन तथा पशु स्वास्थ्य प्रबंधन पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया.











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