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Dairy News: अमूल की तरह बिहार के सुधा ब्रांड को भी मिलेगी वैश्विक पहचान, सरकार ने बनाया प्लान

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
प्रतीकात्मक फोटो. Live stockanimal news

नई दिल्ली. जिस तरह से अमूल ब्रांड ने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. भविष्य में बिहार का सुधा ब्रांड को इसी तरह का ब्रांड बनाने का सपना बिहार सरकार देख रही है. इसी क्रम में डेयरी सेक्टर में कई अहम काम किए जा रहे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बीते छह-सात महीनों में राज्य में दो हजार से अधिक नई दुग्ध उत्पादक समितियों का गठन हुआ है, जिससे प्रतिदिन करीब तीन लाख लीटर अतिरिक्त दूध का संग्रह शुरू हुआ है. सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध उत्पादन तक पहुंचाना है.

उन्होंने कहा कि अब सरकार सुधा को केवल बिहार या देश तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. जिस तरह अमूल ने वैश्विक पहचान बनाई है, उसी तरह सुधा को भी विश्वस्तरीय ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लगभग 2,500 नई दुग्ध समितियां सक्रिय हैं.

88 स्थानों का किया गया चयन
सरकार ने राज्य में दो सौ नए सुधा बिक्री केंद्र खोलने की योजना के तहत 88 स्थानों का चयन भी कर लिया है. जबकि सभी 534 प्रखंडों में बिक्री केंद्र स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रत्येक प्रखंड में आधुनिक ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे.

जहां दूध, सब्जी और मछली की बिक्री एक ही परिसर में होगी. भोजपुर में प्रस्तावित एक्वा पार्क भी इसी योजना का हिस्सा है.

वहीं सरकार ने राज्यभर में एक हजार नए पशु औषधि केंद्र खोलने की भी घोषणा की.

वहीं नालंदा के लिए अलग दुग्ध उत्पादक संघ गठित करने का आश्वासन दिया गया है.

उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिला पटना दुग्ध संघ से संबद्ध है, लेकिन उत्पादन क्षमता को देखते हुए नालंदा का अपना स्वतंत्र संघ बनने से किसानों को अधिक लाभ मिलेगा और दुग्ध व्यवसाय को नई गति मिलेगी.

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि इस डेयरी परियोजना की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में रखी गई थी.

आज उसी योजना का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि डेयरी विकास के बिना गांवों की समृद्धि संभव नहीं है.

बकरी पालन को उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और जीविका समूहों के लिए ‘एटीएम’ की संज्ञा देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर यही पशुधन परिवार की आर्थिक जरुरतों को पूरा करता है.

Written by
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