Home पशुपालन Animal Husbandry: अल-नीनो की आशंका के बीच भेड़, बकरी और दूसरों पशुओं पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
पशुपालन

Animal Husbandry: अल-नीनो की आशंका के बीच भेड़, बकरी और दूसरों पशुओं पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

goat farming sheep farming
प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग और विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा वर्ष 2026 में अल-नीनो के प्रभाव तथा कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा एवं अधिक तापमान की संभावना व्यक्त की गई है. ऐसी परिस्थितियों में भेड़, बकरी और अन्य पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन तथा प्रजनन पर बुरा असर पड़ सकता है. अल-नीनो की संभावना को देखते हुए केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर ने पशुपालकों के लिए सलाह जारी की गई हे. संस्थान ने कहा है कि वैज्ञानिक पशु प्रबंधन अपनाकर अल-नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादन एवं कल्याण को सुरक्षित रखा जा सकता है.

संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में पशुपालकों को चारा एवं जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए. उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि अल-नीनो के दौरान रेवड़ का आकार जरूरत के मुताबिक कम रखें. कहा कि कमजोर एवं अनुत्पादक पशुओं को अलग करें, जिससे उपलब्ध चारा एवं पानी का उपयोग स्वस्थ, गर्भित एवं दुग्धारू पशुओं के लिए प्राथमिकता से किया जा सके और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव कम हो.

चारा स्टोर करना शुरू करें
उन्होंने कहा कि स्वस्थ एवं उत्पादक पशुओं को प्राथमिकता देते हुए सूखा चारा, पराली एवं फसल अवशेषों का सुरक्षित भंडारण करें.

संकर नेपियर, ज्वार, बाजरा, लोबिया एवं अन्य सूखा-सहनशील चारा फसलों की खेती को बढ़ावा दें.

साथ ही नीम, खेजड़ी, बबूल, पीपल, बरगद, शहतूत तथा कांटारहित नागफनी जैसी वृक्ष प्रजातियों की पत्तियों का भी पूरक चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है.

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. नृपेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि गर्मी के दौरान पशुओं को स्वच्छ एवं ताजा पेयजल दिन में 3–4 बार उपलब्ध कराना होगा.

बारिश के पानी के संचयन को बढ़ावा देना तथा हवादार एवं छायादार पशुशालाओं की व्यवस्था करना आवश्यक है.

उन्होंने सलाह दी कि चराई केवल प्रातः 8:30 से 11:00 बजे तथा सायं 4:00 से 6:30 बजे के बीच कराई जाए.

आवश्यकता होने पर पशुशालाओं में पंखे, फॉगर्स अथवा पानी के छिड़काव जैसी व्यवस्थाएँ कर हीट स्ट्रेस को कम किया जा सकता है.

उन्होंने आगे बताया कि गर्भित एवं दुग्धारू पशुओं को संतुलित आहार, दाना, खल तथा खनिज मिश्रण अवश्य दिया जाए.

चारा संकट की स्थिति में टोटल मिक्स्ड रेशन (TMR) अथवा कम्प्लीट फीड ब्लॉक का उपयोग लाभकारी रहेगा.

साथ ही पशुओं का नियमित टीकाकरण एवं कृमिनाशन कराना, बाह्य परजीवियों का नियंत्रण करना तथा प्रतिदिन पशुओं के शरीर का तापमान, श्वसन दर, चारा एवं पानी सेवन पर निगरानी रखना आवश्यक है.

निष्कर्ष
संस्थान ने पशुपालकों से अपील की है कि वे सामुदायिक चारा बैंक स्थापित करने, चारा संरक्षण तकनीकों जैसे हे एवं साइलेज अपनाने तथा वैज्ञानिक सलाह के अनुसार पशु प्रबंधन कर अल- नीनो की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करें और पशुधन की उत्पादकता एवं किसानों की आय को सुरक्षित रखें.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

तोतापरी की बकरी के पालन में बहुत ही कम लागत आती है. तोतापुरी या तोतापरी बकरी कम लागत में पालकर मोटी कमाई की जा सकती है.
पशुपालन

Goat Farming: बकरी पालन में सफल होने के हैं पांच फॉर्मूले

नई दिल्ली. बकरी पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो जरूर...

livestock animal news
पशुपालन

Goat Farming Tips: बकरियों को खिलाएं नमक, सेहत, ग्रोथ और उत्पादन के लिए है जरूरी

नई दिल्ली. बकरी पालन में अच्छा करने के लिए जरूरी है कि...

कीड़े बकरे के पेट में हो जाएं तो उसकी ग्रोथ रुकना तय है.
पशुपालन

Goat Farming News: बकरी हीट में न आए तो सेहत और पोषण की जांच करें, तनाव से दूर रखें

नई दिल्ली. पशुपालन में जानवरों का हीट में आना जरूरी होता है....

पशुपालनमछली पालन

Kisan Mela: किसान मेले में पशुपालन और मछली पालन के फायदे गिनाए

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के...