नई दिल्ली. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह का कहना है कि एनडीडीबी की अगुवाई में ‘ऑपरेशन फ्लड’ कार्यक्रम चलाया गया, जिसने भारत को दूध की कमी वाले और आयात पर निर्भर देश से बदलकर दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना दिया. अब हम भारत को ‘दुनिया की डेयरी’ बनाने के विजन को साकार करने के लिए अगले बड़े कदम की तैयारी कर रहे हैं. अब भारतीय डेयरी सेक्टर में स्टार्ट-अप्स आ चुके हैं और वे भारतीय डेयरी उद्योग और हमारे डेयरी किसानों के लिए एक नया शानदार अध्याय लिखने में अहम भूमिका निभाने को तैयार हैं.
उन्होंने कहा कि भारत का डेयरी सेक्टर हर लिहाज से असाधारण है. देश ने 248 मिलयन मीट्रिक टन MMT दूध का उत्पादन किया और पिछले दशक में सालाना 5.3 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की, जो वैश्विक औसत विकास दर से दोगुनी से भी ज्यादा है. प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जो लगभग 330 ग्राम के वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है.
डेयरी किसानों की समस्याएं की गईं हैं दूर
उन्होंने कहा कि सबसे अहम बात यह है कि यह सेक्टर सीधे तौर पर 8 करोड़ से ज्यादा परिवारों की आजीविका का साधन है.
जो इस बात का सबूत है कि डेयरी उद्योग ग्रामीण भारत में आर्थिक और पोषण सुरक्षा के सबसे शक्तिशाली जरियों में से एक बना हुआ है.
हालांकि लाखों गांवों में फैले करोड़ों छोटे किसान, जिनमें से कई के पास सिर्फ 1-2 जानवर हैं.
छोटे किसानों द्वारा की जाने वाली इस डेयरी खेती को आज दुनिया भर में डेयरी उद्योग के सबसे टिकाऊ रूप के तौर पर पहचाना जा रहा है.
इस तरह, तेज़ी से हो रहे विकास, बदलती टेक्नोलॉजी और बड़ी संख्या में छोटे खेतों की वजह से भारत में सभी के लिए एक साथ आगे बढ़ने के भरपूर मौके हैं.
पशुओं की सेहत, ब्रीडिंग, खान-पान, सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकॉनमी, खाद की वैल्यू चेन, ट्रेसेबिलिटी और बाजार तक सीधी पहुंच (लास्ट-माइल मार्केट लिंकेज) जैसे कई क्षेत्रों में नए रास्ते खुले हैं.
वहीं कंपनियां ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बना रही हैं जो छोटे डेयरी किसानों को मवेशियों के लिए लोन, बीमा और ज़रूरी सामान खरीदने के लिए बाजार की सुविधा देते हैं.
इससे उस क्रेडिट गैप (लोन की कमी) को दूर करने में मदद मिलती है, जिसने लंबे समय से दूध उत्पादकों के लिए पशुओं की नस्ल सुधारने और वर्किंग कैपिटल (रोज़मर्रा के कामकाज के लिए ज़रूरी पूँजी) की व्यवस्था करने में बाधा डाली है.
कुछ अन्य स्टार्टअप टिकाऊ और नए तरीकों से पशुपालकों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले चारे की कमी को दूर करने का काम कर रहे हैं.
जबकि कुछ स्टार्टअप खेती-बाड़ी में मेहनत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक मशीनीकरण और इलेक्ट्रिक समाधान विकसित कर रहे हैं.
ये भारतीय डेयरी सेक्टर में उभर रहे विविध और तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम के कुछ उदाहरण हैं.











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