Home मछली पालन Fish Farming Tips: सर्दियों में मछली पालन में बरतें ये सावधानियां, तभी मिलेगा बेहतर रिजल्ट
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Fish Farming Tips: सर्दियों में मछली पालन में बरतें ये सावधानियां, तभी मिलेगा बेहतर रिजल्ट

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. सर्दियां मछली पालन के लिए भी खतरनाक है. मछली पालन में नुकसान से बचने के लिए जरूरी है कि सर्दियों में मछलियों का अच्छी तरह से ध्यान रखा जाए. अगर ऐसा करते हैं तो मछलियों की ग्रोथ भी अच्छी होगी और प्रोडक्शन भी बेहतर मिलेगा. असल में ​सर्दियों में पानी की ऊपरी सतह बहुत ठंडी हो जाती है, जिसके कारण मछलियां सतह पर आने से बचती हैं और तालाब के तल (Bottom) में बैठ जाती हैं. इसलिए मछलियों के लिए ​फ्लोटिंग (तैरने वाले) फीड की बजाय सिंकिंग फीड (Sinking Feed) यानि डूब जाने वाला चारे का उपयोग प्राथमिकता से करें, ताकि नीचे बैठी मछलियाँ आसानी से आहार ग्रहण कर सकें.

​तालाब के खुले पानी का तापमान ठंड में काफी गिर जाता है, जबकि जमीन के नीचे (बोरवेल) से निकलने वाले पानी का तापमान तुलनात्मक रूप से गर्म होता है. इसलिए ​तालाब में नियमित अंतराल पर बोरवेल का ताजा पानी डालते रहें. इससे तालाब के तल का तापमान संतुलित रहता है और मछलियों को ठंड का झटका नहीं लगता. इससे मछलियां अच्छा महसूस करती हैं और उनकी ग्रोथ सामान्य रहती है.

इन बातों पर भी ध्यान दें
​यदि तालाब में आईएमसी कतला, रोहू, मृगल या अन्य मछलियों का घनत्व अधिक है, तो बड़ी मछलियों की आंशिक निकासी करना बेहद ही जरूरी हो जाता है.

​ठंड में ऊपरी और मध्य सतह की मछलियां भी नीचे तल में आ जाती हैं. अत्यधिक भीड़ होने से ऑक्सीजन की कमी, तनाव और बीमारियों (जैसे फंगल इन्फेक्शन व मोटेलिटी) का खतरा बढ़ जाता है.

वहीं ​सर्दियों में मछलियां कमर्शियल पूरक आहार (फ्लोटिंग पैलेट्स) खाना काफी कम कर देती हैं.

​इसलिए पानी में फाइटोप्लैंकटन (Phytoplankton/प्राकृतिक सूक्ष्म वनस्पति) का स्तर संतुलित रखना बेहद ही जरूरी हो जाता है.

वहीं ​प्राकृतिक भोजन उपलब्ध रहने से मछलियों का मेटाबॉलिज्म चलता रहता है और सर्दियों में भी उनकी शारीरिक ग्रोथ पूरी तरह नहीं रुकती है.

वहीं पहले बताया गया डूबने वाला फीड भी मछलियों के लिए सही रहता है. क्योंकि मछलियां पानी के अंदर रहकर उन्हें खाती हैं और अपना पेट भरती हैं.

वहीं इसके उलट अगर मछलियां अपना पेट नहीं भर पाएंगी तो फिर ज्यादा दिनों तक जिंदा भी नहीं रह पाएंगी.

निष्कर्ष
ठंड का आगाज तकरीबन हो ही चुका है. इसलिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें कि ठंड में क्या सावधानी बरतनी है. जिससे मछली पानल में नुकसान न हो.

Written by
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