नई दिल्ली. पशुपालन करने वाले पशुपालक भाई इस बात को बखूबी जानते हैं कि अगर बछड़ा कमजोर पैदा हो गया तो इसके कई नुकसान हैं. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा होने से बछड़े की मौत होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. जिससे पशुपालन में नुकसान होता है. जबकि ऐसा ना भी हो तो भी उसकी ग्रोथ बेहद ही धीमी होती है. जबकि रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम रहती है. इससे बीमारियां जल्दी से उसे घेर लेती हैं. वहीं इस वजह से भविष्य में दूध उत्पादन और बछड़े की कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे में अक्सर बछड़े दूध नहीं पी पाते हैं. उनमें सेलेनियम आयोडीन की कमी और हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है. जिससे बड़ा आर्थिक नुकसान होता है. एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि अगर बछड़े कमजोर पैदा हों तो बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है. कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनको आजमा कर उनको सेहतमंद किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि जब बछड़ा कमजोर पैदा हो तो अगले 24 घंटे तक क्या करें. जिससे वह सेहतमंद हो जाए.
तुरंत सूखे कपड़े से बछड़े को पोंछ दें
एक्सपर्ट का कहना है कि जैसे ही बछड़ा कमजोर पैदा हो उसे तुरंत खड़ा करने की कोशिश करें. उसे सूखे कपड़े आदि से अच्छी तरह से पोंछ देना चाहिए.
यदि बछड़े को ठंड लगे या फिर वो ठंड में पैदा हुआ है तो तुरंत गर्म जगह पर उसे रखना चाहिए. ताकि और ज्यादा उसे ठंड ना लगे.
क्योंकि जैसे ही उसका शरीर गर्म होगा उसे ताकत मिलने लगेगी. इसलिए उसे गर्मी देना बेहद जरूरी है.
जन्म से 1 से 2 घंटे के अंदर मां का पहला दूध यानी खीस बछड़े को पिलाना चाहिए. अगर मात्रा की बात की जाए तो एक से डेढ़ लीटर तक पिला सकते हैं.
अगर बछड़े को 1 से 2 घंटे के अंदर खीस पिलाते हैं, तो यह दवा और ताकत दोनों का काम करती है. जबकि इससे बछड़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही बढ़ती है.
24 घंटे की प्लानिंग की बात की जाए तो दिन में तीन से चार बार खींस को पिलाना चाहिए.
कोशिश करें कि दूध ठंडा न पिलाएं. क्योंकि उसे नुकसान कर सकता है. बछड़े को उसकी मां के पास ले जाएं लेकिन जगह सूखी होना चाहिए.
हर हाल में बछड़े को 6 घंटे के अंदर खींस पिलाएं. अगर छह घंटा बीत जाए और बछड़ा खींस न पिए तो फिर दिक्कत बढ़ सकती है. बछड़े को कभी ठंडी या गीली जमीन पर ना सुलाएं. इससे उसे परेशानी हो सकती है.
निष्कर्ष
अगर रिपोर्ट में बताई गई बातों का ध्यान रखते हैं तो फिर कमजोर बछड़े को सेहतमंद कर सकते हैं और इससे पशुपालन में फायदा बढ़ जाएगा.












