नई दिल्ली. पिछले दिनों बिहार के पटना व भागलपुर समेत कई जिलों में कौवों की मौत के बाद बर्ड फ्लू की आशंका को देखते हुए तमाम पोल्ट्री फार्मर्स को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया था. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी करते हुए कहा गया कि पोल्ट्री फार्मर्स बर्ड फ्लू के खतरे की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतें. ताकि उनका बिजनेस खराब ना हो यदि बर्ड फ्लू का खतरा होता भी है तो इसे वहीं रोका जा सके. इसके बाद से तमाम जिलों में सेनेटाइजेशन का काम भी किया जा रहा है. ताकि बर्ड फ्लू के खतरे की आशंका को खत्म किया जा सके.
गौरतलब है कि चिकन और अंडा इस दौरान लोगों की रोजमर्रा की डाइट में शामिल है. जबकि ये प्रोटीन की जरूरतों को भी पूरा करता है. ऐसे में डेयरी, मत्स्य एवं पशु सांसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) की ओर से इसका सेवन करने वाले लोगों को कुछ सलाह दी गई है. ताकि आम लोग खुद को बर्ड फ्लू के खतरे से बचा सकें. आई इस बारे में डिटेल से जानते हैं कि क्या करना चाहिए.
बर्ड फ्लू की आशंका के दौरान चिकेन और अंडा खाने में बरतें जरूरी सावधानी
अंडे 0और मुर्गियों को पकाने से पहले उसकी अच्छी तरह से सफाई करें और फिर उसे पूरी तरह से पकायें.
अंडे और मुर्गियों की सफाई के बाद अपने हाथों को भी साबुन से साफ करें.
आमतौर पर बर्ड फ्लू का वायरस 70°C तापमान पर नष्ट हो जाता है.
किसी स्थान पर बर्ड फ्लू रोग की पुष्टि होने पर भी अंडे व चिकन 70°C तापमान पर पकाकर खाने में कोई नुकसान नहीं है.
मृत पक्षियों को न छुएं, न उठाएं और न ही चीड़-फाड़ करें.
यदि कहीं मृत या बीमार पक्षी दिखाई दें, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन या पशुपालन विभाग को सूचित करें.
अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अधिकृत स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर विश्वास करें.
देश में वर्ष 2006 में बर्ड फ्लू रोग की पुष्टि हुई है, लेकिन इंसानों में अभी तक इस रोग का संक्रमण नहीं पाया गया है.
पक्षियों को छूने के बाद हाथ साबुन से अच्छी तरह धोएं.
मरे हुए पक्षियों से दूर रहें.
मुर्गियों को हमेशा ढंक कर रखें.
जंगली पक्षियों को न मारें और उनका मांस न खाएं.
साफ-सफाई का ध्यान रखें और सतर्क रहें.
निष्कर्ष
यदि ये काम कर लिए जाएं तो इससे आम लोग और पोल्ट्री फार्मर्स भी खुद को बर्ड फ्लू के खतरे से बचा सकते हैं.












