नई दिल्ली. सरकार डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए किसानों की आर्थिक रूप से मदद करती है. इसके लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं चलाई जाती हैं. असल में सरकार का उद्देश्य है कि छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देकर उनको आत्मनिर्भर बनाया जाए. जिसके लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना मध्य प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही है. जिसमें सीधे तौर पर पशु की खरीद पर किसान भाई को 75 फीसद तक सब्सिडी सरकार की तरफ से मुहैया कराई जाती है. यानी पशु की लागत पर सिर्फ 25 परसेंट खर्च करके ही किसान भाई पशुपालन का काम शुरू कर सकते हैं.
डेयरी प्लस योजना मध्य प्रदेश में छोटे और सामान्य किसानों को रोजगार देने के लिए सब्सिडी पर दो उन्नत नस्ल की मुर्रा भैंस खरीदने में मदद करती है. सरकार का ये भी मानना है कि योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. जिससे सरकार के दूध उत्पादन बढ़ाने के काम में भी मदद मिल सकती है. क्योंकि सरकार राज्य में 9 फीसद हो रहे दूध उत्पादन को 20 परसेंट तक करने की योजना पर काम कर रही है.
क्या-क्या हैं इस योजना के फायदे
डेयरी प्लस योजना की बात की जाए तो कम लागत में उच्च क्वालिटी के दूध उत्पादन करने वाले पशु इस योजना की मदद से किसान खरीद सकते हैं.
मुर्रा नस्ल की भैंस दूध उत्पादन के लिए बहुत बेहतर नल मानी जाती है. अगर आप भी मध्य प्रदेश के निवासी हैं. मुर्रा नस्ल की भैंस से पशुपालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ये अच्छा मौका आपके इसलिए साबित हो सकता है.
सरकार की तरफ से सामान्य, ओबीसी के लिए 50 फीसद तक सब्सिडी दी जाती है. जबकि अनुसूचित जाति जनजाति के लिए 75 परसेंट तक अनुदान दिया जाता है.
आपको बता दें कि पशुधन और कुक्कुट विकास निगम की ओर से मुर्रा नस्ल की भैंस उपलब्ध कराई जाती है. ताकि किसान डेयरी फार्मिंग का काम शुरू कर सकें हैं.
यदि आप भी इस योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं तो नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था या विकासखंड के पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करके योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं.
निष्कर्ष
डेयरी फार्मिंग का काम इतना शानदार काम है कि इसको करने से अच्छी कमाई की जा सकती है. ये काम खासतौर पर उन किसानों के लिए बहुत अच्छा है जिनके पास कृषि के लिए बहुत ज्यादा जमीन नहीं है. वो डेयरी फार्मिंग के जरिए अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं.












