नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना में पशु उत्पादन प्रबंधन विभाग के प्रमुख डॉ. यशपाल सिंह का कहना है कि पशुओं में गर्मी के लक्षणों (Heat detection) की जांच दिन के शुरुआत या देर के घंटों में 2-3 बार में करनी चाहिए और ये तब करें जब पशु तनाव-मुक्त होकर आराम कर रहे हों. जब जानवर भूखे हों, या किसी भी तरह के तनाव में हों, तो उनमें गर्मी (हीट) का पता लगाने की कोशिश कभी न करें. उन्होंने डेयरी किसानों को सलाह दी कि वे गर्म मौसम के दौरान डेयरी पशुओं में गर्मी के तनाव (हीट स्ट्रेस) से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए खिलाने के सबसे अच्छे तरीकों को अपनाएं.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गर्मियों में चारे का सेवन कम हो जाता है. इसलिए राशन की ऊर्जा घनत्व को बाईपास या सुरक्षित वसा (protected fat) के पूरक के माध्यम से बढ़ाया जाना चाहिए. साथ ही, चयापचय से उत्पन्न होने वाली गर्मी को कम करने के लिए ‘रूमेन डिग्रेडेबल प्रोटीन’ और ‘रूमेन अनडिग्रेडेबल प्रोटीन’ के संतुलित अनुपात को बनाए रखते हुए, आहार में अतिरिक्त प्रोटीन से बचना चाहिए.
खराब भूसा है तो कम खिलाएं
किसानों को मक्का साइलेज, बरसीम घास और ताज़े हरे चारे जैसे आसानी से पचने वाले और अच्छी गुणवत्ता वाले चारे का उपयोग करना चाहिए. जबकि राशन में खराब गुणवत्ता वाले भूसे की मात्रा सीमित रखनी चाहिए.
रूमेन के स्वास्थ्य, शरीर में पानी की मात्रा (हाइड्रेशन) और खनिजों के संतुलन को बनाए रखने के लिए यीस्ट, सोडियम बाइकार्बोनेट, इलेक्ट्रोलाइट्स और पर्याप्त मात्रा में पोटेशियम, सोडियम और मैग्नीशियम के पूरक को देना भी महत्वपूर्ण है.
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पशुओं को थोड़ा नम (गीला) TMR (कुल मिश्रित राशन) दिया जाए, और राशन का 60–70 परसेंट हिस्सा शाम या रात के समय खिलाया जाए.
साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पशुओं को खाने और पानी पीने के लिए पर्याप्त जगह मिले.
पशु चिकित्सा परजीवी विज्ञान की प्रोफेसर-सह-प्रमुख, डॉ. परमजीत कौर ने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कृमि-नाशक दवा (deworming) और टीकाकरण के उचित कार्यक्रम का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए.
गर्मियों के मौसम में बाहरी परजीवियों (ecto-parasites) का प्रकोप बढ़ जाता है, इसलिए पशुओं पर और पशुशाला (शेड) के अंदर—विशेष रूप से कोनों और दरारों में उपयुक्त कीटनाशक स्प्रे का उपयोग करके इसे ठीक से नियंत्रित किया जाना चाहिए.
इस दौरान ‘जैव-सुरक्षा’ (Biosecurity) सबसे महत्वपूर्ण है; किसी भी बाहरी व्यक्ति को फार्म परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, और प्रवेश द्वार पर कीटाणुनाशक पाउडर का छिड़काव किया जाना चाहिए.
गर्मियों के मौसम में उचित देखभाल और प्रबंधन के तरीकों को अपनाने से किसानों को अपने पशुओं को स्वस्थ रखने, दूध का उत्पादन बढ़ाने और डेयरी फार्मिंग से निश्चित लाभ कमाने में मदद मिलेगी.











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