नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने पंजाब भर के पशुपालकों को मुफ्त फीड और दूध टेस्टिंग साथ ही राशन बनाने की सेवाएं देने के लिए एक अत्याधुनिक मोबाइल फीड और दूध टेस्टिंग लैब (MFML) बनाने के लिए एक अहम प्रोजेक्ट पर काम करने जा रही है. असल में वैट यूनिवर्सिटी को केमिन इंडस्ट्रीज साउथ एशिया से 1.55 करोड़ की बड़ी ग्रांट हासिल हुई है. जिसकी मदद से अब पशुपालकों को मुफ्त फीड और दूध टेस्टिंग साथ ही राशन बनाने की सेवाएं देने के लिए एक अत्याधुनिक मोबाइल फीड और दूध टेस्टिंग लैब (MFML) बनाया जाएगा.
वाइस-चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने प्रोजेक्ट टीम को बधाई दी और इस पहल को पंजाब के डेयरी सेक्टर को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप बताया. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक फीड और दूध टेस्टिंग सेवाओं तक सीमित पहुँच कई पशुपालकों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है और मोबाइल लैब इस कमी को दूर करने में मदद करेगी.
पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी
डॉ. गिल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट वैट यूनिवर्सिटी और केमिन इंडस्ट्रीज के उस साझा विजन के अनुरूप है.
जिसका मकसद टेक्नोलॉजी-आधारित सेवाओं के जरिए पशुओं की उत्पादकता, दूध की गुणवत्ता, फीड की सुरक्षा और किसानों की आय को बढ़ाना है.
प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और एनिमल न्यूट्रिशन विभाग के प्रमुख डॉ. जे एस हुंदल ने बताया कि फीड, चारे, साइलेज, एफ्लाटॉक्सिन और दूध की टेस्टिंग के लिए पूरी तरह से सुसज्जित ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ (चलती-फिरती लैब) बनाई जाएगी.
पंजाब के अलग-अलग ज़ोन और हब में काम करते हुए, यह मुफ़्त टेस्टिंग, सलाहकारी सेवाएं, राशन बनाने की सुविधा और फीड सुरक्षा, मैस्टाइटिस (थनैला रोग) की रोकथाम, साइलेज मैनेजमेंट और आधुनिक डेयरी टेक्नोलॉजी पर किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम उपलब्ध कराएगी.
रिसर्च डायरेक्टर डॉ. एसएस रंधावा ने ग्रांट हासिल करने में प्रोजेक्ट टीम की कोशिशों की तारीफ़ की और कहा कि यह प्रोजेक्ट सबूत-आधारित पशुपालन विस्तार और किसान-केंद्रित सेवा वितरण के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगा.
इसके असर और नतीजों के आधार पर, वेट यूनिवर्सिटी और केमिन इंडस्ट्रीज़ का इरादा और मोबाइल लैब के जरिए इस प्रोग्राम को बढ़ाने का है.
निष्कर्ष
ताकि लंबे समय में पंजाब के सभी ज़िलों को कवर किया जा सके और किसानों तक वैज्ञानिक पशुपालन सलाह और डायग्नोस्टिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके. इससे पशुपालकों को फायदा मिलेगा. उनकी इनकम को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.











