नई दिल्ली. बकरी पालन कम लागत में और आसानी से किया जाने वाला काम है. जबकि इसमें मुनाफा भी अधिक मिलता है. बकरियों को न सिर्फ मीट उत्पादन के लिए बल्कि दूध उत्पादन के लिए भी पाला जा रहा है. बकरी भले ही दूध का उत्पादन कम करती है लेकिन इसका दूध बेहद ही गुणकारी होता है. इसलिए इससे अच्छी इनकम होती है. डेंगू जैसी बीमारी फैलने के दौरान तो बकरी का दूध किसी भी अमृत से कम नहीं रहता है और तब इसका दाम 400 रुपए लीटर तक पहुंच जाता है. ऐसे में बकरी पालकों के पास अच्छा मुनाफा कमाने का मौका रहता है.
मध्य प्रदेश की सरकार बकरी पालन को बढ़ावा देना चाहती है. इसलिए बैंक लोन और सब्सिडी पर 10 बकरी और एक बकरा के साथ बकरी पालन की योजना लाई है. बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए योजना की शुरुआत की गई है. जिसका मुख्य उद्देश्य देसी बकरियां में नस्ल सुधार करना और बकरी पालक को ज्यादा फायदा पहुंचाना साथ ही मांस के साथ-साथ दूध का उत्पादन करना है.
योजना की डिटेल यहां जानें
इस योजना को सभी वर्ग के भूमिहीन कृषि मजदूर सीमांत और लघु किसानों के लिए लागू किया गया है.
हालांकि जिसे इस योजना फायदा लेना है, उनके पास बकरी पालन का अनुभव होना जरूरी है. योजना प्रदेश के सभी जिलों में संचालित की जा रही है.
देसी स्थानीय नस्ल की एक बकरी के लिए 6000 रुपए प्रति बकरी लागत रखी गई है. 10 बकरी के लिए 60 हजार रुपए लागत है.
जमुनापारी, बरबरी, सिरोही और बीटल बकरे के लिए 7500 की अलग से लागत तय की गई है.
इस योजना के तहत बीमा राशि 10.35 फीसद की दर से 5 साल के लिए 6986 रुपए निर्धारित की गई है.
बकरी के आहार के लिए 250 ग्राम प्रतिदिन के हिसाब से 2970 रुपए निर्धारित किया गया है. योजना की कुल इकाई लागत 77 हजार 456 रुपए निर्धारित की गई है.
अनुसूचित जनजातीय, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 60 फीसद का अनुदान और सामान वर्ग के लिए 40 परसेंट का अनुदान तय किया गया है.
निष्कर्ष
10 परसेंट बकरी पालक को खुद लगाना होगा और बाकी का लोन लिया जा सकता है. अगर आपके पास बजट का अभाव है तो फिर आप इस योजना का फायदा लेकर बकरी पालन करके आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. जिससे आपको भविष्य में ज्यादा फायदा होगा.











