नई दिल्ली. जून का महीना भीषण गर्मी वाला है. इसलिए पशुओं का ध्यान और ज्यादा बेहतर ढंग से रखने की जरूरत इस महीने में होती है. अगर ऐसा न किया जाए तो फिर पशुपालन में नुकसान होगा. असल में गर्मी की वजह से पशु परेशान होंगे और उत्पादन पर असर आएगा. नतीजे में डेयरी फार्मर्र को नुकसान उठाना पड़ सकता है. जबकि कोई भी पशुपालक नहीं चाहेगा कि पशु का दूध उत्पादन कम हो. जबकि इसी महीने में पशुओं के बीमार रहने का भी खतरा होता है जो और भी ज्यादा खतरनाक होता है.
यदि आप चाहते हैं कि जून के इस तपिश भरे महीने में आपका पशु बीमार न हो और वो अपनी क्षमता के मुताबिक ही दूध का उत्पादन करता रहे तो फिर यहां बताई गई बातों पर जरूर गौर करें और इसे पशुपालन में आजमाएं.
किस तरह रखें पशु का ध्यान
इस माह पशु को खिलाए जाने वाले दाने के मिश्रण में नमक और मिनरल मिक्सचर की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए.
असल में मिनरल मिक्सचर पशु के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है.
पशु के लिए हर चारा जरूरी होता है. जितना हो सके, हरा चारा खिलाएं.
24 घंटे पशुओं को साफ और ठंडा पानी देना भी जरूरी है.
दोपहर 11 से शाम 4 बजे तक पशुओं को सीधी धूप से बचाना चाहिए.
मानसून से पहले गलाघोंटू का टीका पशु को जरूर लगवा देना चाहिए.
क्योंकि बरसात शुरू होने के बाद बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
जून के अंत तक अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर टीकाकरण और पेट के कीड़ों की दवा (अंतः कृमि नाशन) जरूर दिलवा लें.
दिन में कम से कम 4 से 5 बार पशुओं को ताजा पानी पिलायें.
पानी में थोड़ा गुड़ और नमक मिलाकर पिलाएं. नमक और गुड़ के पानी से पशुओं को इलेक्ट्रोलाइट्स मिलता हैं.
पानी की टंकी को हमेशा छाया में रखें. पशु गंदा पानी न पीने दें.
गर्मी में दोपहर के समय भारी भोजन पचाने में पशुओं के शरीर में अधिक गर्मी पैदा होती है. इसलिए दोपहर में पशुओं को भारी चारा नहीं देना है.
पशुओं को चराई पर ले जाने या भारी चारा देने के लिए हमेशा सुबह जल्दी या देर शाम का समय चुनें.
दोपहर में उन्हें आराम करने दें. पशुओं के बांधने की जगह को हवादार बनाएं.
खिड़कियों पर खस या जूट के परदे लगाकर उन पर पानी छिड़कें, इससे तापमान 4-5 डिग्री तक कम हो जाता है.












