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Dairy: NDDB के कोऑपरेटिव डेवलपमेंट मॉडल को करीब से जानने के लिए NCDC प्रतिनिधिमंडल पहुंचा आनंद

बैठक में मौजूद NCDC और NDDB के अधिकारी.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) का काम देश भर में सहकारी समितियों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और उन्हें वित्तीय मदद देना है. इसी कड़ी में NCDC (नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर रोहित गुप्ता और LINAC के डायरेक्टर जनरल मनोज कुमार की अगुवाई में NCDC के एक प्रतिनिधिमंडल ने आनंद की यात्रा की. अपनी इस अहम यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह और NDDB के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की.

10 सदस्यों वाली यह टीम NDDB के कोऑपरेटिव डेवलपमेंट मॉडल का अध्ययन करने के लिए वहां गई थी, और अहम मसलों पर उनसे चर्चा भी की. बैठक के दौरान, डॉ. शाह ने डेयरी कोऑपरेटिव सेक्टर को मजबूत करने में NDDB की अहम भूमिका पर जोर दिया और डेयरी वैल्यू चेन, यानी गाय से लेकर कंज्यूमर तक में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और उसकी सहायक कंपनियों की गतिविधियों के बारे में बताया.

MoU साइन करने पर भी हुई चर्चा
डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और फाइनेंशियल, टेक्निकल और क्षमता-निर्माण के जरिए मिल्क यूनियनों और फेडरेशनों को सपोर्ट करने के लिए NDDB और NCDC के बीच हुए MoU पर आगे की कार्यवाही के बारे में भी चर्चा हुई.

NDDB के चेयरमैन ने प्रतिनिधिमंडल को NDDB के लगातार सहयोग का भरोसा दिलाया और रणनीतिक साझेदारी और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के जरिए कोऑपरेटिव-आधारित डेयरी विकास को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

प्रतिनिधिमंडल ने “त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी (इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद), NDDB की सहायक कंपनियों – NDDB CALF लिमिटेड और IDMC लिमिटेड का दौरा किया.

साथ ही अमूल डेयरी और त्रिभुवनदास फूड कॉम्प्लेक्स, मोगर, और नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का दौरा किया.

उन्होंने वासना और मुजकुवा गांव में स्लरी प्रोसेसिंग सेंटर में भी विजिट किया, जहां उन्होंने डेयरी किसानों से बातचीत की.

जबकि इस दौरान खाद प्रबंधन, डेयरी कोऑपरेटिव कामकाज और सोलर पंप इरिगेटर्स कोऑपरेटिव एंटरप्राइज (SPICE) में NDDB के प्रयासों को देखा.

निष्कर्ष
डेयरी कोऑपरेटिव सेक्टर को मजबूत करने के फायदे की बात की जाए तो मोटे तौर पर सके तीन फायदे हैं. एक फायदा ये है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है. जबकि किसानों की इनकम में इजाफा होता है, जो सरकार भी चाहती है. जबकि उपभोक्ताओं को सही दाम पर गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट मिलता है. इसके अलावा बिचौलियों का भी खेल खत्म हो जाता है.

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