नई दिल्ली. सरकार देश में पशुपालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. ताकि पशुपालन के जरिए किसानों की इनकम को दोगुना किया जाए. इसी कड़ी में कई काम किए जा रहे हैं. सरकार वंश परीक्षण एवं वंशावली चयन कार्यक्रम भी चला रही है. जिसके तहत स्वदेशी नस्लों के रोगमुक्त उच्च आनुवंशिक गुण वाले सांडों को उत्पन्न करने के लिए वंश परीक्षण एवं वंशावली चयन कार्यक्रम देश भर में लागू किया गया है. अब तक 4620 उच्च आनुवंशिक गुण वाले सांड उत्पन्न किए गए हैं, जिन्हें देश भर के वीर्य उत्पादन केंद्रों को उपलब्ध कराया गया है.
खासतौर पर हरियाणा राज्य की मुर्रा नस्ल की भैंसों के लिए वंश परीक्षण कार्यक्रम और हरियाणा नस्ल की गायों के लिए वंशावली चयन कार्यक्रम लागू कर रहा है. इस कार्यक्रम में अब तक मुर्रा नस्ल की भैंसों के 369 उच्च आनुवंशिक गुण वाले सांड और हरियाणा नस्ल की गायों के 69 उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले सांड उत्पन्न किए गए हैं.
गोकुल ग्राम की गई स्थापना
इस योजना के तहत हरियाणा समेत देश भर में किसानों को स्वदेशी मवेशी नस्लों के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए प्रजनन शिविर, दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता, बछड़ा रैलियां, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, संगोष्ठी और कार्यशालाएं, सम्मेलन आदि आयोजित किए गए हैं.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत, हरियाणा के हिसार में गोकुल ग्राम की स्थापना की गई थी ताकि हरियाणा नस्ल के मवेशियों और मुर्रा नस्ल की भैंसों का वैज्ञानिक और समग्र रूप से विकास और संरक्षण किया जाए.
संशोधित पुनर्गठित राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 2021-22 से 2025-26 के दौरान इस घटक को बंद कर दिया गया है.
केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग और राज्य सरकार द्वारा योजनाओं और उपायों के समन्वित कार्यान्वयन प्रयासों से हरियाणा में मवेशियों की कुल उत्पादकता 2014-15 में 7.69 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन से बढ़कर 2024-25 में 10.70 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन हो गई है. जो कि 39.14 प्रतिशत की वृद्धि है.
हरियाणा में देशी और गैर-प्रजाति मवेशियों की उत्पादकता 2014-15 में 5.38 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन से बढ़कर 2024-25 में 7.35 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन हो गई है, जो कि 36.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.
हरियाणा में भैंसों की उत्पादकता 2014-15 में 7.79 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन से बढ़कर 2024-25 में 11.07 किलोग्राम प्रति पशु प्रति दिन हो गई है, जो कि 42.10 प्रतिशत की वृद्धि है.
हरियाणा में दूध का उत्पादन 2014-15 में 79.01 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 125.93 लाख टन हो गया है, जो पिछले 11 वर्षों में 59 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।











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