नई दिल्ली. प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम की तरह प्रदेश में आदर्श पशु ग्राम बनाए जाएंगे. किसान कल्याण वर्ष के चलते प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए यह प्रयोग किया जा रहा है. गांव में गो-भैंस वंशीय पशुओं के नस्ल सुधार, सौ प्रतिशत टीकाकरण, पशुओं का खान-पान आदर्श रखने सहित अन्य मापदंडों का पालन करने पर कलेक्टर आदर्श ग्राम घोषित करेंगे. इससे पशुपालकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. बता दें कि देश के कुल दूध उत्पादन में मप्र की भागीदारी अभी नौ प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रखा है.
इसी कड़ी में उत्पादन बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं. इसमें एक आदर्श पशु ग्राम योजना भी है. विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि सभी कलेक्टर ऐसे गांव चिह्नित कर रहे हैं. इसमें सबसे अधिक जोर नस्ल सुधार और दुधारू पशुओं के खान-पान पर है. अधिकारियों का मानना है कि नए दुधारू पशु खरीद कर दुग्ध उत्पादन बढ़ाना महंगा है.
एननडीडीबी बिक्री में करेगा मदद
पशुपालक इसके लिए आसानी से तैयार नहीं होंगे. इस कारण नस्ल सुधार और खान-पान के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से दूध उत्पादन, प्रसंस्करण और बिक्री बढ़ाने के लिए अनुबंध किया है.
बता दें कि मप्र अभी दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे नंबर पर है. प्रतिदिन लगभग साढ़े 12 लाख लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है.
उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘गोरस’ एप भी पशुपालन विभाग ने बनाया है. इसमें नस्ल, आयु आदि जानकारी डालने पर पता चल जाता है कि दुधारू पशु को क्या जरूरत है.
दुधारू पशुओं का बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण भी किया जाएगा. इसका कारण यह कि संक्रमण से दुग्ध उत्पादन प्रभावित होता है.
‘गोरस’ मोबाइल एप में यह मिल रहीं सुविधाएं
सरकार का गोरस ऐप पूरी तरह से हिदी मोबाइल ऐप है, जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इंटरनेट सुविधा नहीं होने पर भी एप काम करता है.
एप गाय, भैंस के लिए संतुलित आहार के बारे में सुझाव देगा.
चारे का संयोजन चुन सकते हैं, कम से कम लागत में अधिकतम दूध उत्पादन मिलता है.
एप में 28 से अधिक स्थानीय चारों की विस्तृत जानकारी दी गई है.
मौसम और गर्भावस्था के अनुसार भी आहार का सुझाव यह एप देता है.
गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा, भदावरी एवं संकर नस्लों के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन दिया गया है.
पशुपालकों को संभावित आर्थिक लाभ और नस्ल सुधार के वारे में जानकारी मिलती है.











Leave a comment