नई दिल्ली. जैसे-जैसे ठंड की शुरुआत होती है. वैसे-वैसे डेयरी पशुओं का दूध उत्पादन घटने लगता है. एक्सपर्ट का कहना है कि पशु खुद को ठंड से बचने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करते हैं. इसकी वजह से उन्हें ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है लेकिन ठंड में ऊर्जा की कमी की वजह से भी दूध उत्पादन कम हो जाता है. हालांकि कुछ आसान से उपाय हैं, जिनको करने से दूध उत्पादन में इजाफा किया जा सकता है. यानी आप पशु का दूध उत्पादन 20 से 30 फीसद तक बढ़ा भी सकते हैं. इसके लिए पशुओं को ठंड में गर्माहट ही नहीं बल्कि ऐसा आहार देना चाहिए जो उनके लिए बेहतर हो.
पशुओं को इस तरह का चारा दें जो उन्हें आसानी से पच जाए. ऐसा आहार पशु को ऊर्जा देता है. इस मौसम में पशुओं के लिए भूसा बेहतरीन सोर्स माना जाता है. इसलिए कोशिश करें कि पशु को भरपेट भूसा खिलाएं. इसके साथ ही आहार में आप गेहूं का दलिया, ज्वार, चना और सरसों की खली भी शामिल कर सकते हैं.
क्या खिलाया जाना चाहिए
इस मौसम में पशुओं को बिनौला भी खिलाया जाता है लेकिन बिनौला सीधे नहीं खिलाना चाहिए. इसको खिलाने के लिए रात भर पानी में इसको भिगो दें और फिर सुबह पानी बदलें. हल्का सा उबालें और दो बार में खिलाएं. ऐसा करने से बिनौला पशुओं को पच भी जाएगा और दूध उत्पादन भी बढ़ जाएगा.
पशुओं को गुड़ और सरसों का तेल भी दिया जा सकता है. ठंड में गुड़ और सरसों का तेल देने से उनके शरीर में गर्मी रहती है. पशु बीमार भी नहीं पड़ते हैं. पशुपालक इसे चारे में मिलाकर दे सकते हैं. इससे दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ती है.
पशुओं को ठंड के दिनों में सूरज की रोशनी भी मिलनी चाहिए. उन्हें दिन में धूप में थोड़ी देर बांधना चाहिए. बहुत ज्यादा बंद कमरे में पशुओं को नहीं रखना चाहिए
ठंड का मौसम ऐसा होता है, जिसमें भी बीमारियां पशुओं को परेशान करती हैं. पशु की गंदगी जैसे गोबर आदि को साफ करना चाहिए.
पशु खाने-पीने में सुस्त दिखें तो उनका उपचार जरूर करवाएं. रोजाना पशु के नीचे सूखा बिछावन बिछाना चाहिए.
ताकि पशु को ठंड न लगे. रात में आप उन्हें खाना खिलाने के बाद थोड़ा गुनगुना पानी भी दे सकते हैं.
निष्कर्ष
यदि आप इन उपायों को करते हैं तो इससे पशु का दूध उत्पादन नहीं कम होगा. वहीं हो सकता है कि दूध उत्पादन बढ़ भी जाए. इसलिए पशुपालकों को इन उपायों को जरूर आजमाना चाहिए.












