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Animal Husbandry News: पशुपालकों को बिना जमानत 2 लाख रुपए का लोन देगी सरकार

गोवंश के लिए योगी सरकार ने समाज को भी इस अभियान का हिस्सा बनाते हुए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रखी हैं.
चारा खाती एफएफ गाय.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में पशुपालन में उद्यमिता का विकास, दूध उत्पादन में वृद्धि और नस्ल संवर्धन के उद्देश्य से डॉ भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है. इसके अलावा भी सरकार कई काम कर रही है. जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है. पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ आर्थिक मदद के काम भी सरकार की ओर से किए जा रहे हें. इसी क्रम में मध्य प्रदेश में लाखों पशुपालकों को क्रेडिट कार्ड जारी करने की तैयारी सरकार की ओर कर ली है. ताकि ​कृषि की तर्ज पर पशुपालकों को भी इसका फायदा हो सके.

मध्य प्रदेश के पशुपालन और डेयरी राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने बताया कि 3 लाख 96 हजार 537 पशुपालन क्रेडिट कार्ड जारी किए जा सकते हैं. इन कार्ड की मदद से पशुपालक अपने दुधारू पशुओं के भरण पोषण के लिए चारा, दाना, भूसा आदि की समुचित व्यवस्थाएं कर सकते हैं.

लोन की शर्तें हैं आसान
योजना के तहत बिना जमानत 2 लाख और जमानत के साथ 3 लाख रुपये तक का ऋण न्यूनतम ब्याज दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है.

जिसकी मदद से पशुपालक अपने पशुओं का और बेहतर तरीके से ख्याल रख पाएंगे और इससे उन्हें पशुपालन के काम में और फायदा मिलेगा.

वहीं प्रदेश के युवाओं को पशुपालन में स्वरोजगार प्रदान करने का अवसर मुहैया करने के लिए भी काम किया जा रहा है.

सरकार की तरफ से उच्च अनुवांशिक गुणवत्ता वाले पशुओं के उत्प्रेरण से नस्ल सुधार एवं और दूध उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम पूरे प्रदेश में लागू किया गया है.

अब मध्य प्रदेश का पशुपालक दुधारू पशु लाने के लिए अन्य राज्यो में नहीं भटकेगा, बल्कि वह अन्य राज्यों को दुधारू पशु उपलब्ध कराएगा.

योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के फार्म ‘नस्ल संवर्धन केन्द्र’ बनेगें जिससे समाज और सरकार नस्ल सुधार कार्यक्रम के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम कर सकेंगे.

योजना के तहत स्थापित इकाइयां उच्च अनुवांशिक गुणों के नस्लों के लिए संसाधन केन्द्र का काम करेंगी. इससे भी आय में वृद्धि होगी.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नेतृत्व वाली सरकार मध्य प्रदेश को दूध उत्पादन में नंबर वन बनाना चाहती है.

इसी लक्ष्य की पूर्ति के लिए एक सुनियोजित रणनीति के तहत व्यवस्थित और बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग में कई तरह के नवाचार भी किए जा रहे हैं.

इनमें प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान कार्य की गुणवत्ता में सुधार कर, गौशालाओं को उन्नत नस्ल का केन्द्र बनाया जाएगा.

वहीं तथा कृत्रिम गर्भाधान कार्य में सॉर्टेड सेक्सड सीमन का उपयोग बढ़ाकर अधिक दूध उत्पादन वाले बेहतर नस्ल के पशु तैयार करने के लिए ‘हिरण्यगर्भा अभियान’ भी संचालित किया जा रहा है.

Written by
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