नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है. असल में ऐसी बहुत सी जगह है, जहां की जमीन कृषि के लायक नहीं है. जबकि मछली पालन करके उस जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिसका फायदा उठाकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. वहीं मछली पालन एक ऐसा काम है, जो बहुत अच्छी कमाई कराता है. इस काम को करके सालाना तीन से चार लाख रुपए कमाए जा सकते हैं. यही वजह है कि सरकार इस काम को बढ़ावा दे रही है. उत्तर प्रदेश में कई योजनाएं शुरू की गई हैं.
सरकार की तरफ से सघन मत्स्य पालन के लिए एयरेशन सिस्टम की स्थापना के लिए भी योजना चलाई जा रही है. सरकार की ओर से बताया गया है कि महिला मत्स्य पालकों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है. इससे महिलाएं मछली पालन करके अपने परिवार की इनकम को बढ़ा पाएंगी.
योजना का उद्देश्य
इस योजना के तहत सघन मत्स्य पालन में आक्सीकरण संयंत्रों (एयरेटर) के उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादकता में हर तरह से वृद्धि का लक्ष्य है.
तालाब के मत्स्य उत्पादन क्षमता बढ़ाते हुए महिला मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति सही करने के उद्देश्य के साथ साथ प्रदेश के मत्स्य उत्पदन के स्तर में वृद्धि करना है.
साथ ही मछली और झींगा की उत्पादकता और उत्पादन में निरंतर वृद्धि करना है.
तालाब में मशीनरी व उपकरण आदि द्वारा रोग के प्रकोप को रोककर, जैविक कारकों को स्थिर करके महिला मत्स्य पालकों के मुनाफे को अधिकतम करना है.
किसे मिलेगा योजना का फायदा
बता दें कि ये योजना महिला मत्स्य पालकों के लिए संचालित की गई है. योजना के तहत मत्स्य बीज हैचरी संचालित करने वाली हैचरी स्वामिनी, निजी क्षेत्र एवं पट्टे पर आवंटित तालाब धारक ऐसी महिला मत्स्य पालक जिनके तालाब की वर्तमान मत्स्य उत्पादकता कम से कम 4 टन प्रति हे० हो तथा पट्टा अवधि कम से कम 5 वर्ष अवशेष हो पात्र होंगी.
परियोजना के तहत आधे हेक्टेयर जमीन के तालाब में 2 हार्सपावर के एक क्वाड पैडिल व्हील एरियेटर एवं एक हेक्टेयर या उससे बड़े तालाब हेतु अधिकतम दो एरियेटर पर अनुदान दिया जायेगा. एयरेटर की इकाई लागत रुपए 75 हजार है.
परियोजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं हेतु इकाई लागत का 50 प्रतिशत अनुदान एवं अनुसूचित वर्ग की महिलाओं हेतु इकाई लागत का 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में दी जाती है.
योजना का फायदा
एयरेटर स्थापना से तालाबों के मत्स्य उत्पादकता में वृद्धि होगी.
अधिक मत्स्य उत्पादन प्राप्त होने से मत्स्य पालक की आय में वृद्धि होगी.
प्रदेश में मत्स्य उत्पादन के स्तर में वृद्धि होगी.
जनसामान्य के प्रोटीनयुक्त आहार की उपलब्धता में वृद्धि होगी.










