नई दिल्ली. सरकार पशुपालन को बढ़ावा देना चाहती है. ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान पशुपालन के क्षेत्र में आगे आएं और इस काम को करके अपनी इनकम बढ़ाएं. दरअसल सरकार का ये मानना है कि पशुपालन करके किसान अपनी इनकम को दो गुना कर सकते हैं. इसी वजह से पशुपालन के सेक्टर में सरकार कई काम कर रही है. 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश किया. जैसा कि उम्मीद की जा रही थी, पशुपालन और डेयरी विभाग के लिए सरकार की तरफ से अहम ऐलान किए गए.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किए के बजट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा को बढ़ावा देने पर जोर दिया. उनकी तरफ से बजट में ऐलान किया गया कि पूंजी में सब्सिडी सहायता योजना की शुरुआत की जाएगी. बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में वेटरनरी और पैरा वेटरनरी अस्पतालों का आधुनिककरण करने की भी बात कही गई.
क्या-क्या और मिला बजट में
बताया गया कि सरकार की तरफ से मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों को बढ़ाया जाएगा. पैरा वेट स्टाफ के लिए नई ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना भी की जाएगी. ताकि गांवों तक पशुओं का इलाज मिल सके.
बजट में इस बात का भी ऐलान किया गया है कि 2026-27 के लिए चिकित्सीय सेवाओं को मजबूत बनाने के संबंध में 1.5 लाख पशु देखभाल सेवा प्रदाताओं यानी पैरावेट को ट्रेनिंग दी जाएगी.
ताकि पशुओं की बीमारियों को कम किया जा सके. उनमें मृत्यु दर को कम किया जा सके और इसका फायदा पशुपालकों को मिल सके.
पशु अस्पताल में डिजिटल डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार करने की बात भी सरकार की तरफ से कही गई है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पशुपालन क्षेत्र को इस साल 6153 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड बजट समर्थन दिया गया है.
एक्सपर्ट का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की इनकम को मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है.
आपको यहां ये भी बताते चलें कि 2025—26 में पशुपालन डेयरी विभाग को 4850 करोड़ रुपए दिए गए थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2024—25 में 4521 करोड़ पर दिए गए थे.
कुल मिलाजुला कर कहा जाए तो इस बार सरकार की ओर से भारी भरकम बजट दिया गया है और पिछले 2 साल के मुकाबले इसमें बड़ा इजाफा किया गया है.
सरकार की तरफ से पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या को 20000 से ज्यादा करने की घोषणा की गई है. जिससे पशुओं का इलाज बेहतर तरीके से संभव हो सकेगा.
जब पशुओं को बेहतर इलाज मिलेगा तो उनमें बीमारियां कम होंगी. जिससे उत्पादन बढ़ेगा और इसके चलते पशुपालकों की इनकम भी बढ़ जाएगी.












