नई दिल्ली. सर्द मौसम की शुरुआत हो चुकी है और इसका असर पशुओं की सेहत पर भी दिखने लगा है. ठंड पशुओं को बेहद ही परेशान करती है. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fishery Resources) के एक्सपर्ट की मानें तो अगर समय पर सावधानी न बरती जाए तो इससे दुधारू पशुओं के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ता है. क्योंकि पशुओं को अपने शरीर को गर्म रखने के लिए ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है. ऐसे में दूध उत्पादन पर असर होता है. हालांकि कई ऐसे उपाय हैं, जिनको आजमा कर सर्दी के मौसम में भी पशुओं को पूरी तरह से फिट रखा जा सकता है.
ऐसे में जरूरी है कि डेयरी फार्म में सर्द हवाएं आने से रोकी जाए. इसके लिए तिरपाल, बोरे, प्लास्टिक की शीट आदि से डेयरी फार्म को ढककर हवा को रोका जा सकता है. फर्श को सूख रखना भी बेहद जरूरी है. ताकि पशु सीधे तौर पर ठंडी जमीन पर न बैठें. दरवाजे बंद रखना और दिन में खोलना जरूरी होता है. ताकि पशुओं को जरूरी गर्मी मिल सके.
पशुपालकों को क्या करना है
एक्सपर्ट का कहना है कि गर्मी के मुकाबले पशु ठंड में पानी कम पीते हैं. इसकी वजह से कई बार उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है.
इसके चलते खून गाढ़ा हो जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इस समस्या से बचने के लिए उन्हें गुनगुना पानी पिलाना चाहिए.
यदि पशुओं को गुनगुना पानी पिलाया जाए तो इससे उनका शरीर गर्म रहेगा.
गुनगुना पानी पिलाते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि अगर आप उसमें हाथ डालें तो आपको आराम महसूस हो, जलन न हो तो ऐसे पानी आप उन्हें पिला सकते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि सर्दी के मौसम में पशुओं को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है.
इसलिए उन्हें गुड़, सरसों या अलसी का तेल, भूसा के साथ दलिया या चोकर मिलकर खिलाया जाना चाहिए.
पशुओं को हरा चारा भी दें लेकिन कोशिश करें कि ठंडा होने पर थोड़ा धूप में सुखाकर ही खिलाएं.
यदि संभव हो सके तो रात में गर्म दलिया दें. इससे पशुओं के शरीर में गर्माहट बनी रहेगी.
निष्कर्ष
पशुओं को दिन में धूप जरूर दिखाएं हो सके तो उन्हें धूप में बांधे और डेरी फार्म की नियमित रूप से सफाई करते रहें. भूसा या बिछावन गंदा हो गया तो उसे तुरंत बदल दें. नमी होने पर कई दिक्कतें बढ़ती है जिससे बीमारियां बढ़ सकती हैं. जिससे दूध उत्पादन में कमी आएगी.












