नई दिल्ली. बकरी पालन में अगर सफल होना है तो ये जरूरी है कि बकरियों को बीमार न होने दिया जाए और बकरियों को बीमारी से बचाने के लिए वैक्सीन सही समय पर लगाई जाए. हालांकि यह तभी संभव हो पाएगा, जब आपको पता होगा कि कौन सी वैक्सीन कब लगाई जाती है और इससे किस खतरनाक बीमारी से बकरियों को बचाया जा सकता है. बकरियों को वैसे तो कई वैक्सीन लगाई जाती है लेकिन तीन वैक्सीन बेहद अहम होती है. अगर इन्हें ही लगा लें या फिर लगवा लें तब भी बकरी पालन में सफल हो सकते हैं.
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि वह तीन वैक्सीन कौन सी है जिसे लगाने से बकरियों को बीमारियों से बचाया जा सकता है तो केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को इस बारे में जानकारी दी गई है. आइए यहां डिटेल से जानते हैं.
कब कौन सी वैक्सीन लगाई जाए
जब बकरी की उम्र 3 महीने हो जाए तो सबसे पहले डीवार्मिंग करना चाहिए. ताकि उसके पेट के अंदर अगर कोई कीड़ा है तो वह खत्म हो जाए.
डीवार्मिंग करने के एक हफ्ते के बाद ईटी और टीटी की वैक्सीन लगाई जानी चाहिए. ये वैक्सीन 2 एमएल लगाई जाती है और इसे बकरियों की चमड़ी में लगाया जाता है.
उसके बाद आपको 21 दिन का गैप देना है. जिस बकरी को ईटी और टीटी का टीका लगाया गया है, उसे पीपीआर की वैक्सीन लगाना है.
पीपीआर की वैक्सीन एक एमएल लगाई जाती है और इसे भी बकरी की चमड़ी में लगाया जाता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि यदि बकरी गाभिन है तो इस वैक्सीन को एक्सपर्ट की सलाह पर ही लगाना चाहिए. पीपीआर की वैक्सीन बकरियों को इस बीमारी से 3 साल तक बचाती है.
वहीं तीसरी वैक्सीन एफएमडी की लगाई जाती है. खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए बकरी के मांस में इस वैक्सीन को लगाया जाता है.
अगर आप खुद लगा सकते हैं तो लगा लें या फिर पशु चिकित्सक से इसे लगवा लें.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप इन तीन वैक्सीन को भी लगवा लेते हैं तो बकरी पालन में बकरियों को बीमारियों से बचा पाएंगे. इससे बकरी पालन में आप सफल भी हो जाएंगे. जिसका फायदा आपको मिलेगा.












