नई दिल्ली. ये बात किसी से भी नहीं छिपी है कि गायों से मिलने वाली पांच चीजें, जिसे पंचगव्य कहते हैं, जिसमें दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर शामिल है, इससे यूपी सरकार रोजगार पैदा करने के प्लान पर काम कर रही है. इतना नहीं, सरकार इन चीजों से दवाएं भी बनाएगी. आयुर्वेद और परंपरागत चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सरकार दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर (पंचगव्य) का इस्तेमाल करेगी. जिसके मद्दनेजर आयुर्वेदिक मंजन, मलहम और औषधीय उत्पाद तैयार होंगे. जिसका फायदा हर तबके के लोगों को मिलेगा.
सरकार इन उत्पादों को औपचारिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में शामिल करने जा रही है. सरकार का कहना है कि इसका बड़ा फायदा ये भी है कि इससे ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा और गोशालाओं की उपयोगिता भी पहले से अधिक बढ़ जाएगी. उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से कहा गया है कि एक्सपर्ट इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि गोमूत्र में औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इसलिए अब डायबिटीज और हृदय रोग जैसी कुल 19 बीमारियों के इलाज में गोमूत्र से बनने वाले प्रोडक्ट अहम भूमिका में होंगे.
किन बीमारियों में है कारगर पंचगव्य
उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के मुताबिक पंचगव्य में चमड़े की बीमारी, गठिया जोड़ों का दर्द, मुंहासे, साइनस, दमा एवं सांस संबंधी रोग को ठीक करने के गुण हैं. इतना नहीं पीलिया, पेट दर्द, तेज बुखार, एनीमिया, टॉन्सिल, हृदय रोग, चक्कर, सर दर्द, पालिप्स, डैंड्रफ, मधुमेह, गंजापन, अवसाद, रक्त विकार, दांत दर्द आदि में भी आराम पहुंचाने के गुण हैं.
क्या है योगी सरकार का प्लान
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव की मानें तो आयुष विभाग के सहयोग से पंचगव्य आधारित उत्पादों के निर्माण की दिशा में मजबूती से कदम आगे बढ़ाया जा रहा है. बता दें कि पंचगव्य का खास महत्व है और अब इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तैयार कर आमजन के लिए फायदेमंद दवाओं के रूप में इस्तेमाल केे लिए तैयार किया जा रहा है. योगी सरकार की योजना है कि पंचगव्य से बनने वाले उत्पादों को नए रिसर्च से जोड़ा जाए और इसे प्रमाणिक बनाया जाए. इससे इन उत्पादों को व्यापक स्तर पर चिकित्सा पद्धति में स्थान मिलेगा.
क्या और फायदा होगा
इस योजना से जहां देश की पुरानी चिकित्सा को फिर से मजबूती मिलेगी तो वहीं गोपालकों, किसानों और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद की जा रही है. कहा जा रहा है कि पंचगव्य उत्पादों की मांग बढ़ने से गोशालाओं की उपयोगिता भी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. जिसका फायदा सभी तबके लोगों को मिलेगा.










