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Dairy: डेयरी सेक्टर के इस खतरे से निपटने के लिए एनडीडीबी ने की ये पहल

NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी शाह और डॉ. रणजीत बंद्योपाध्याय.

नई दिल्ली. भारत का डेयरी सेक्टर बहुत मजबूत है. लगातार ये तरक्की के नए आयाम छू रहा है. भारत दुनिया में दूध उत्पादन करने के मामले में अपनी स्थिति को और मजबूत करता जा रहा है. जिससे सेक्टर से जुड़े लोगों को फायदा हो रहा है. जहां एक ओर डेयरी सेक्टर आगे जा रहा है तो वहीं इसे खतरा भी है. भारत में एफ्लाटॉक्सिन कंटैमिनेशन एक ऐसा खतरा है जो फूड सेफ्टी और डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है. जिससे निपटने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने तैयारी शुरू कर दी है.

इस कड़ी में NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी शाह और NDDB के सीनियर अधिकारियों ने आनंद में NDDB में IITA CGIAR के एमरिटस साइंटिस्ट और सीनियर प्लांट पैथोलॉजिस्ट और अफ्रीका-वाइड अफलासेफ पहल के को-फाउंडर डॉ. रणजीत बंद्योपाध्याय से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान इस मामले में गहन चर्चा हुई.

क्या है खतरा, पढ़ें यहां
वहीं डॉ. बंद्योपाध्याय ने अफलासेफ पर एक डिटेल प्रेजेंटेशन दिया और बताया कि भारत में एफ्लाटॉक्सिन कंटैमिनेशन से निपटने के लिए इसके संभावित इस्तेमाल पर चर्चा की, जो फूड सेफ्टी और डेयरी सेक्टर के लिए एक बढ़ती चिंता है.

उन्होंने 21 अफ्रीकी देशों में अफलासेफ की सफल तैनाती पर जोर दिया, और फसल की क्वालिटी, मार्केट तक पहुंच और किसानों की इनकम को बेहतर बनाने में इसकी भूमिका पर जोर दिया.

डॉ. बंद्योपाध्याय ने NDDB के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्थागत क्षमता की भी तारीफ की.

NDDB के चेयरमैन ने NDDB के सपोर्ट का भरोसा दिलाते हुए, एफ्लाटॉक्सिन को डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ी चिंता बताया और संकेत दिया कि NDDB भारत में एफ्लाटॉक्सिन को कम करने पर काम करने में दिलचस्पी रखेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एफ्लाटॉक्सिन संदूषण का खतरा बहुत गंभीर है, क्योंकि यह एक जहरीला फफूंद (फंगस) है.

ये फंगस अनाज, मेवों (जैसे मूंगफली), और सूखे खाद्य पदार्थों को दूषित करता है, जिससे फूड सेफ्टी को एक बड़ा खतरा है.

ये कोई गंध या स्वाद नहीं छोड़ता, केवल लैब टेस्ट से ही पता चलता है, इसलिए कटाई और स्टोरेज में सावधानी बरतना जरूरी है.

ये फंगस दूषित चारे के जरिए जानवरों के शरीर में पहुंचता है और फिर दूध की गुणवत्ता को गिराने का काम करता है.

वहीं इससे डेयरी पशुओं को स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं हो जाती हैं. इसके अलावा पशुओं के प्रजनन पर भी इसका बुरा असर दिखाई देता है.

Written by
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