नई दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री (Ministry of Road Transport and Highways, Government of India) नितिन गडकरी ने मेलघाट मिल्क प्रोक्योरमेंट नेटवर्क का डिजिटल उद्घाटन किया गया. इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने मेलघाट क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के संकल्प को दोहराया. साथ ही महिला किसानों को विशेष रूप से पशुपालन का विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करने पर जोर दिया. कहा कि मेलघाट से हर दिन 1 लाख लीटर दूध संकलन हो ये मेरा सपना है, जिससे 40–50 हजार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. उन्होंने कार्यक्रम के दौरान, 3–6 वर्ष के 1,000 आदिवासी बच्चों को प्रोटीन के महत्व के प्रति जागरूक करने हेतु ‘शिशु संजीवनी कार्यक्रम’ की शुरुआत की. जिससे कुपोषण से मुक्ति का लक्ष्य रखा गया है.
मंत्री ने कहा कि मेलघाट एक सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा क्षेत्र रहा है, जिसे डेयरी विकास के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा. उन्होंने उल्लेख किया कि मदर डेयरी और मराठवरहाड़ दुग्ध उत्पादक संस्था ने दूध खरीद मूल्य में वृद्धि कर किसानों को उचित फायदा दिलाया है और सालभर वर्षभर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया है.
महिलाओं को भी मिलेगा फायदा
उन्होंने मदर डेयरी नागपुर में लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक दूध प्रोसेसिंग स्थापित करने की योजना की जानकारी दी, जहां आइसक्रीम, बर्फी जैसे वैल्यू-ऐडेड उत्पाद बनाए जाएंगे.
मंत्री ने बताया कि मदर डेयरी सहकारी मॉडल पर कार्य करती है, जिससे शोषण की कोई संभावना नहीं रहती.
उन्होंने डॉ. मीनेश शाह अध्यक्ष, एनडीडीबी और उनकी टीम को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए बधाई एवं धन्यवाद व्यक्त किया.
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डेयरी के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण, आदिवासी समुदाय का आर्थिक उत्थान और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित होगी. जबकि भविष्य में मेलघाट की स्थिति निश्चित रूप से बेहतर होगी.
यह पहल ग्रामीण समृद्धि, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.
वहीं डॉ. शाह ने कहा कि एनडीडीबी और मदर ने कहा कि मेलघाट जैसे सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों वाले क्षेत्र में संगठित दुग्ध संकलन नेटवर्क की स्थापना केवल डेयरी पहल नहीं, बल्कि समग्र ग्रामीण परिवर्तन की शुरुआत है.
उन्होंने बताया कि 20 गांवों से दुग्ध संकलन प्रारंभ कर 75 गांवों तक विस्तार और प्रतिदिन 7,000 लीटर संकलन का लक्ष्य क्षेत्र के किसानों, विशेषकर महिलाओं, को स्थिर आय प्रदान करेगा.
महिला-संचालित ग्रामीण संस्थाओं, डिजिटल भुगतान और पशुपालन मार्गदर्शन के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण को गति मिलेगी.
उन्होंने डेयरी के साथ सहायक गतिविधियों-चारा विकास, उत्पादकता संवर्धन, गोबर आधारित ऊर्जा, मधुमक्खी पालन तथा आय विविधीकरण-को एकीकृत मॉडल का हिस्सा बताया.
कार्यक्रम के अंत में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 50 आंगनवाड़ी बच्चों को पोषण-समृद्ध ‘शिशु संजीवनी’ किट वितरित की गई.












