नई दिल्ली. सरकार की तरफ से साल 2024 में व्हाइट रिवॉल्यूशन यानी श्वेत क्रांति 2.0 की शुरुआत की गई थी. जिसके तहत दूध उत्पादन बढ़ाने महिला सशक्तिकरण करने की बात कही गई थी. सरकार ने 2028—29 तक सहकारी डेयरी के जरिए दूध खरीद को 660 लीटर से बढ़कर 1000 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य व्हाइट रिवॉल्यूशन के तहत ही करने का लक्ष्य तय किया है. साथ ही असंगठित सेक्टर को संगठित क्षेत्र में तब्दील करने का भी लक्ष्य है. इसी क्रम में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की ओर से कई अहम काम किए जा रहे हैं. ताकि सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्य को हासिल किया जा सके और डेयरी सेक्टर में भारत और आगे जा सके.
जानकारी के लिए बता दें इसकी तहत कि NDDB के चेयरमैन, डॉ. मीनेश सी शाह ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में हुई मीटिंग में हिस्सा लिया. यह मीटिंग नरेश पाल गंगवार, सचिव, पशुपालन और डेयरी विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की अध्यक्षता में हुई. मीटिंग में अतिरिक्त सचिव (C&DD), वर्षा जोशी, अतिरिक्त सचिव (LH), रमा शंकर सिन्हा, पशुपालन आयुक्त, डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा, सलाहकार (सांख्यिकी), जगत हजारिका DAHD से सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, राज्य पशुपालन विभाग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, राज्य दुग्ध संघों के प्रबंध निदेशक और केंद्र, राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.
योजनाओं की समीक्षा की गई
इस अहम बैठक के दौरान व्हाइट रिवॉल्यूशन 2.0 और पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) की दूसरी चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई.
मीटिंग के दौरान, NDDB के चेयरमैन ने ‘पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में दूध की आत्मनिर्भरता के लिए रणनीति’ पर एक प्रेजेंटेशन दिया.
जिसमें डेयरी क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए इन राज्यों को NDDB द्वारा दिए गए समर्थन पर प्रकाश डाला गया और भविष्य के रोडमैप की रूपरेखा बताई गई.
समीक्षा बैठक में व्हाइट रिवॉल्यूशन 2.0 के लक्ष्यों, उपलब्धियों और कार्य योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
जिससे बिना कवर वाले गांवों को तेजी से कवर करने और उन्हें सहकारी समितियों के रूप में पंजीकृत करने में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके.
DAHD की योजनाओं जैसे NPDD, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, पशुधन स्वास्थ्य, राष्ट्रीय पशुधन मिशन, LC&ISS की भी समीक्षा की गई.
जिसमें प्रगति, मुख्य चुनौतियों और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए रणनीतियों पर चर्चा की गई.










