नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि भारत का डेयरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका की रीढ़ है. देशभर में 8 करोड़ ग्रामीण परिवार इस पर आश्रित हैं. 2024-25 में भारत में कुल 24 करोड़, 80 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ था और इस प्रकार भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया है तथा समूचे विश्व के दूध उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत उत्पादन हमारे ही देश में होता है. भारत में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता दुनिया में सबसे ज्यादा है, यहां प्रतिदिन 485 ग्राम दूध प्रति व्यक्ति उपलब्ध रहता है.
उन्होंने कहा कि देश में दूध का उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने जितना ही है और इसी कारण से न तो भारत दूध का खास निर्यात कर पाता है और न ही दूध आयात करने की खास जरूरत पड़ती है.
प्रोटीन उत्पादों की डिमांड बढ़ी है
दशकों से दूध, घी, मक्खन, दही, चीज, खोया और परम्परागत मिठाइयों जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों ने देश में डेयरी क्षेत्र का परिदृश्य बदल दिया है.
इसके बाद ही प्रोसेस्ड चीज, दही, फ्लेवर्ड मिल्क, आइसक्रीम, हाई प्रोटीन जैसे मूल्यवर्द्धित उत्पाद से भी फायदा मिला है.
डॉ. शाह ने बताया कि प्रोबायोटिक डेयरी ड्रिंक्स, हाई प्रोटीन उत्पादों के तेजी से चलन में आने के साथ ही उपभोक्ताओं की पसंद में जबरदस्त बदलाव आ गया तथा बाजार में नए-नए अवसरों की भरमार आ गई.
परम्परागत भारतीय चीज का तो देश में सदियों से उत्पादन होता आ रहा है लेकिन उनका उत्पादन और खपत (उपभोग) मुख्यतः स्थानीय स्तर पर ही सीमित रहा और आधुनिक बाजारों में ये उत्पाद बहुत कम पहुंच पाते थे.
पश्चिमी कल्चर की चीज का भी करीब बीस वर्ष से उत्पादन और उपभोग हो रहा है. इनमें मोज्जरेला चेडर चीज, एम्मेंटर या स्विस चीज, फेटा, रिकोट्टा चीज मुख्य रूप से शामिल हैं.
ये चीज ज्यादातर सलाद, पिज्जा, पास्ता, सैंडविच, बर्गर, रैप्स, केक्स आदि में इस्तेमाल होता है और अब इन पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है. भारत में चीज का बाजार 2025 में 12,889 करोड़ रुपये का था.
समझा जा रहा है कि 2034 तक यह बढ़कर 61,988 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा तथा इसमें लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर बनी रहने का अनुमान है.









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