Home मछली पालन Fish Farming Tips: ठंड में संक्रमण से सड़ने लगता है मछलियों का गलफड़ा, नकम से करें इलाज
मछली पालन

Fish Farming Tips: ठंड में संक्रमण से सड़ने लगता है मछलियों का गलफड़ा, नकम से करें इलाज

अगर आप छोटे गड्ढे में मछली पालन का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको तालाब के आकार को चुनना होगा. एक से 2000 स्क्वायर फीट के तालाब में आप बढ़िया मछली पालन कर सकते हैं.
तालाब में मछली.

नई दिल्ली. मछलियों में संक्रमण की वजह से एक नहीं कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. ये बीमारी मछलियों के गलफड़े और स्किन को बेहद ही ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. वहीं गुर्दों को गंभीर नुकसान भी संक्रमण की वजह से पहुंच जाता है. जिसके चलते भारी संख्या में मछलियों में मृत्यु दर दिखाई देती है. अगर इतना बड़ा नुकसान न भी हो तब भी मछलियों की ग्रोथ पर असर तो जरूर ही पड़ता है. फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर समय रहते संक्रमण को नहीं रोका गया तो फिर इसे बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होता है और मछली कारोबार पूरी तरह से घाटे में तब्दील हो जाता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि मछलियों को बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी है. यदि मछली पालन में अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो संक्रमण से होने वाली समस्याओं से मछलियों को हर हाल में बचाना ही पड़ेगा. इस रिपोर्ट में हम आपको मछलियों में फफूंद से होने वाली समस्या और उसके इलाज के बारे में बताएंगे. इस बीमारी का साइंटिफिक नाम सैप्रोलेग्नियासिस है जिसमें आमतौर पर मछलियों की स्किन और गलफड़े प्रभावित होते हैं. ये बीमारी अक्सर चोट और खराब पानी की गुणवत्ता के कारण भी होती है.

शरीर पर पैच दिखाई देता है
इस बीमारी में मछलियों के शरीर पर उजला और पीला पैच सा दिखाई देने लगता है. इसे आसान भाषा में समझे तो रूई जैसा कुछ नजर आता है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि इस फफूंद के कारण गलफड़ों में सड़न होने लगती है. इससे मछलियों को बहुत ज्यादा तकलीफ होती है.

असल में जब गलफड़े सड़ने लगते हैं तो मछलियों को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है. इससे मछलियां मरने लगती हैं.

अगर ऐसा दिखता है तो मछली पालक को इसका इलाज करना चाहिए, नहीं तो मछली पालन में नुकसान हो जाएगा.

इलाज के तौर पर तालाब में 80 किलो प्रति एकड़ की दर से नमक के घोल का छिड़काव करना चाहिए.

एक्सपर्ट का कहना है कि 3 से 5 दिन के गैप पर दो से तीन बार इस चीज को करें तो मछलियों को राहत मिलेगी.

एक दूसरी तरह से भी इलाज कर सकते हैं. इसके लिए 1 लीटर फॉर्मलीन और 100 ग्राम मैलाकाइट ग्रीन 100 लीटर पानी में घोलना होगा.

या फिर मछलियों को पानी के किनारे लाएं. जहां 5000 लीटर पानी है तो वहां पर 1 लीटर फॉर्मलीन 10 लीटर पानी में मिलकर शरीर पर डालना चाहिए.

इस तरीक से मछलियों को अच्छी तरह से बाथिंग कराना चाहिए. ऐसा करने से मछलियों की बीमारी भी दूर हो जाएगी.

निष्कर्ष
बीमार मछली तेजी से तालाब की अन्य स्वस्थ्य मछलियों को बीमार करती है. इसलिए समय पर उचित इलाज जरूरी है. ताकि मछली पालन में नुकसान न हो.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली पालन

Fisheries: प्रोडक्ट ब्रांडिंग और स्मार्ट पैकेजिंग जैसे कामों से भी फिशरीज सेक्टर में कर सकते हैं ग्रोथ

नई दिल्ली. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (MANAGE) फिशरीज इनोवेशन एंड...

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालन

Fish Production: छत्तीसगढ़ में हुआ दोगुना मछली उत्पादन, 10 लाख टन पहुंचा प्रोडक्शन

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग...

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
मछली पालन

Fish Farming: मछली पालकों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई गई, छत्तीसगढ़ में हुए कई विकास कार्य

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने...

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन

Fish Farming: बाजार में मछली की गिरती कीमतों के बीच सरकार ने दी मछली पालकों को राहत

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश सरकार ने जानकारी दी है कि ई-फिश प्लेटफॉर्म...