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Fisheries: बिहार में 54.39 करोड़ रुपये से बन रहा मत्स्य विकास भवन, 38 जिलों के किसानों को मिलेगी ट्रेनिंग

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. किसी भी काम को शुरू करने से पहले उसकी जानकारी होना बेहद ही जरूरी है. यानि उस काम ट्रेनिंग लेना चाहिए. चाहे वो मछली पालन का ही काम क्यों न हो. एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू करने में नुकसान का खतरा बहुत कम रह जाता है. वहीं मुकम्मल जानकारी होती है तो मछली पालन में फायदा भी बढ़ जाता है. इस बात को सरकार भी समझती है. बिहार में मछली पालन को बढ़ावा देने के मकसद से सरकार मछली पालकों के लिए ट्रेनिंग सेंटर भी खोलने जा रही है. ताकि मछली पालक ट्रेनिंग लेकर ज्यादा से ज्यादा मछली का उत्पादन करके अपना इनकम को बढ़ा सकें.

इसी कड़ी में पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीठापुर स्थित मत्स्य विकास भवन का निरीक्षण किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रथम तल पर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल, डायरेक्टर चैंबर, वर्क स्टेशन आदि का जायजा लिया. चौथे तल पर पहुंच कर मुख्यमंत्री ने वहां उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली.

मुख्यमंत्री ने लिया जायजा
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि मत्स्य निदेशालय के तहत इस मत्स्य विकास भवन का निर्माण कराया गया है.

यहां राज्य के सभी 38 जिलों के किसानों को वैज्ञानिक और उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इस नये भवन में एक साथ 120 किसानों के प्रशिक्षण की व्यवस्था है.

इस मत्स्य विकास भवन के प्रांगण में प्रशिक्षकों के रहने के लिए हॉस्टल का निर्माण भी कराया गया है.

54.39 करोड़ रुपये से 2.43 एकड़ में बना यह अत्याधुनिक मत्स्य विकास भवन, मछली पालन अनुसंधान केंद्र और आधुनिक प्रयोगशालाओं से सुसज्जित है.

इस भवन में मत्स्य प्रक्षेत्र के विकास के संदर्भ में अनुसंधान और प्रशिक्षण संबंधी कार्य किये जायेंगे.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मत्स्य एवं पशुपालन विभाग को इस नवनिर्मित मत्स्य विकास भवन में जल्द स्थानांतरित करें.

इस भवन के हर तल पर सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त ऊंचाई की रेलिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराएं. इससे मछलीपालकों को इसका लाभ मिले.

कृषि रोड मैप के लागू होने से सब्जी, दूध, अंडा, मांस, फल सहित अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ा है, जिससे किसानों को काफी लाभ मिल रहा है.

बिहार को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में हरसंभव कोशिश की जा रही है.

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ चंद्रशेखर सिंह, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक, मत्स्य निदेशक तुपार सिंग्ला सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे.

निष्कर्ष
अफसरों का कहना है कि ट्रेनिंग की सुविधा होने से नए मछली पालक भी मछली पालन के काम में आगे आएंगे. जबकि पहले से काम कर रहे मछली पालकों को भी इसका फायदा मिलेगा.

Written by
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