नई दिल्ली. मछली पालन में कुछ ऐसी दिक्कतें आती हैं. जिनकी वजह से मछलियों की ग्रोथ नहीं हो पाती है. कई बार तालाब के अंदर छोटी-छोटी मछलियां कहीं से आ जाती हैं. या कई बार जब बीज खरीदा जाता है तो उसके साथ वहां मछलियां आ जाती हैं. मतलब रोहू, कतला का बीज अगर आप लेने गए हैं तो उसके साथ में ये मछलियां आ जाती हैं और तालाब में आने पर यह मछलियां फिश फार्मिंग के काम में नुकसान का कारण बनती हैं. ऐसे में इस तरह की मछलियों को तालाब से हटाना बेहद ही जरूरी होता है. नहीं तो वह कई नुकसान कर जाती हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि यदि कोई मछली पालक भाई तालाब में 5000 रोहू या कत्ला के बच्चे को डालता है और उसी के हिसाब से मछलियों को फीड भी देता है लेकिन तालाब में जो छोटी-छोटी मछलियां कहीं से आ जाती हैं या फिर बरसात के समय में जब मछलियां ब्रीडिंग करती हैं तो इनकी संख्या हजारों में हो जाती है. ये मछलियां पाली जा रही मछलियों के हिस्से का फीड खाती हैं. उनकी ऑक्सीजन का इस्तेमाल करती हैं और एरिया घेरती हैं. इससे पल रही रोहू और कतला जैसी मछली की ग्रोथ रुक जाती है.
यहां जानें वजह के बारे में
ऐसा तब होता है जब मछली पालक मछली के बच्चों को नदी से खरीदते हैं तो बहुत से लोग मछली के बीज को छानकर दे देते हैं. जबकि इसमें बहुत संख्या में गैरजरूरी छोटी-छोटी मछलियां होती हैं.
कई बार उसके अंदर पोटिया मछली होती है या झींगा का बच्चा भी होता है. अगर ये तालाब में चला गया और जब बरसात आई है तो वो बच्चों को जन्म देने लगते हैं.
इससे पाली गईं मछलियों का विकास काफी कम हो जाता है. ये मछलियां रोहू, कतला जैसी मछलियों का विकास को रोक देती हैं. जिससे आपको मछली पालन के काम में नुकसान होता है.
इसलिए मछली के बच्चे को वहीं से खरीदना चाहिए जहां पर अलग-अलग प्रजाति की मछलियों के बच्चे अलग-अलग बिकते हों. मसलन जहां पर पंगेसियस, रोहू और कतला का अलग-अलग बेचते हों.
निष्कर्ष
अगर आप ऐसा करते हैं तो फिर दूसरी प्रजाति की छोटी मछलियों का तालाब में आने का खतरा खत्म हो जाएगा. इससे आप जिन मछलियों को तालाब में पाल रहे हैं उन्हें जो कुछ भी खिलाएंगे वह अच्छे से खाएंगी और ग्रोथ करेंगी.












