नई दिल्ली. मौसम बदल रहा है. ऐसे में मछली पलकों को सावधान हो जाने की जरूरत है. क्योंकि जब मौसम बदलता है तो मछलियों के लिए कई परेशानी लेकर आता है. जिससे मछली पालन के काम में नुकसान होने का खतरा रहता है. क्योंकि इससे मछलियों की ग्रोथ पर असर पड़ता है. मछलियां बीमार पड़ती हैं और कई बार मछलियां मर भी जाती हैं. यह सारी चीज अचानक से होती है. इस वजह से मछली पालक समझ भी नहीं पाते हैं कि क्या हुआ. हालांकि जो अनुभवी मछली पालक हैं बचाव का उपाय कर लेते हैं. जिससे उनकी मछलियों की ग्रोथ भी नहीं रुकती ना ही वह बीमार पड़ती हैं और ना ही उनमें मृत्यु दर दिखाई देती है.
अगर आप भी नए मछली पालक हैं और तालाब में पल रही मछलियों के अचानक बीमार पड़ने उनकी ग्रोथ धीमी होने, साथ ही अचानक से आई मृत्यु दर से परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य और पशु संसाधन विभाग की ओर से इससे बचाव के लिए कुछ हम टिप्स दी गई है. जिसको आजमा कर आप अचानक से मछलियों के मरने या बीमार होने से बचा सकते हैं. तो आइए इस बारे में जानते हैं.
ऑक्सीजन के लेवल सही रखना चाहिए
विभाग के एक्सपर्ट का कहना है कि बदलता मौसम मछलियों के लिए खतरा बन सकता है. जरूरी नहीं है कि ये हर तालाब में हो लेकिन सावधानी बरतना बेहद ही जरूरी है.
असल में तापमान बदलते ही पानी में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है. जिसकी वजह से मछलियों के बीमार पड़ने और उन्हें मृत्यु दर दिखाई देने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
ऐसे में ऑक्सीजन का लेवल मेंटेन करने की जरूरत है. पानी में एयरेटर आदि चलाकर ताजा पानी भरकर ऑक्सीजन के लेवल सही रखना चाहिए.
एक्सपर्ट का कहना है कि पानी का पीएच 7.5 से 8.5 होना चाहिए. क्योंकि मछलियों में बीमारी और मृत्युदर से रोकने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि पानी में चूना और पोटैशियम परमैंगनेट डालना चाहिए. इससे पीएच का स्तर बैलेंस बना रहता है.
ये वो समय है जब मछलियां कम दाना खाती हैं. ऐसे में उन्हें फीड बेहद कम देना चाहिए.
क्योंकि वो फीड को सही से नहीं पचा पाती हैं. ज्यादा फीड देने से लागत भी बढ़ती है और मछली को दिक्कत भी होती है.
निष्कर्ष
पानी का रंग अगर गहरा होने लगे तो तुरंत इसमें ताजा पानी भरना चाहिए. ताकि पानी भी सही हो जाए. अगर ये सारे काम अपने कर लिए तो अचानक से मछलियों के मरने या बीमार होने का खतरा कम हो सकता है.











