नई दिल्ली. बिहार के खगड़िया जिले को नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गयी है. डीएम विक्रम विरकर ने जिले के व्यापक जलीय संसाधनों के समेकित उपयोग के लिए ‘खगड़िया जिला समेकित मलय विकास-सह-फड़ब पोल्ड फिश मिशन की परिकल्पना की है. इसके तहत पारंपरिक मछली पालन के साथ आधुनिक तकनीकों को जोड़कर मछली उत्पादन को मौजूदा स्तर से करीब पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य प्रस्तावित किया गया है. बताते चलें कि खगड़िया से गंगा कोसी, बागमती कमला बुद्री गंडक, करेट और काली कोसी जैसी प्रमुख नदियों गुजरती हैं.
इसके लिए जिलाधिकारी ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव को प्रस्ताव भेजकर राज्यस्तरीय विशेषज्ञों, तकनीकी संस्थानों और राष्ट्रीय रूप की मत्स्य संख्याओं की सहायक से विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (दीपेआर) तैयार करने का अनुरोध किया है. प्रस्ताव के अनुसार राष्ट्रीय आर्द्रभूनि एटलस के आंकड़ों के आधार पर जिले में करीब 4,645 हेक्टेयर आर्द्रभूमि है, जो जिले के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग आठ प्रतिशत है.
93 हजार मीट्रिक टन है मछली उत्पादन
जिले में नदियों एवं धाराओं के अलावा सरकारी और निजी जलकर, तालाब, गौर, मौन तथा अन्य जल निकाय है.
प्रारंभिक आकालन में 20 हजार हेक्टेयर से अधिक व्यापक जलीय एवं मत्स्य संसाधन उपलब्ध होने की बात कही गयी है.
इनके साथ बड़ी संख्या में धाराएं और उपधाराएं भी जुड़ी हैं. बाढ़ प्रभावित भूमि, चौर और प्राकृतिक जलजमाव वाले क्षेत्रों को भी मत्स्य मन विकास के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में निहित किया गया है.
गौरतलब है कि जिल में 3,200 हेक्टेयर क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से मछली पालन किया जा रहा है दि जिले का वार्षिक मत्स्य उत्पादन करीब में 39.24 हजार मीट्रिक टन बताया गया आ है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि उपलब्ध मत्स्य जल संसाधनों को तुलना में वर्तमान कि उपयोग और उत्पादकता के बीच काफी अंतर है.
इसी अंतर को कम करने के लिए वैज्ञानिक, टिकाऊ और व्यावसायिक मत्स्य विकास की योजना बनाई गयी है.
इसके तहत मौजूदा तालाबों की उत्पादकता बढ़ाने, नये तालाच विकसित करने, चौर और आई भूमि का पुनर्धन, मौन में फलन विधि, बाढ़ भूमि में मत्स्य प्रग्रहण तथा नदी आधारित मत्स्यपालन को बढ़ाक देने की योजना है.
डीएम द्वारा भेजे गये प्रस्ताव में मछती उत्पादन बढ़ाने के लिए पेन कल्चर, केज कल्चर, बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है.
गुणवत्तापूर्ण मछली बीज की स्थानीय उपलब्धता के लिए हैवरी, बीज बैंक, नर्सरी और रियरिंग तालाब विकसित करने का प्रस्ताव है.











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