नई दिल्ली. मछली पालन को किसानों की इनकम का मुख्य जरिया बनाने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है. हजारों करोड़ रुपए सरकार इस सेक्टर में खर्च कर रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान मछली पालन करें और अपनी इनकम बढ़ाएं. वहीं मछली पालन से कृषि के लिए इस्तेमाल में आने वाली जमीन का भी इस्तेमाल हो जाता है और वहां पर मछली पालन करके अच्छी कमाई की जा सकती है. वहीं एक्सपर्ट का कहना है कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए ये भी बेहद जरूरी है कि मछली पालन की सटीक जानकारी फिश फार्मर्स को मिले.
अगर मछली पालन की सही जानकारी नहीं होगी तो फिर इससे फायदा नहीं मिलेगा. इसलिए मछली पालकों का ट्रेनिंग लेना जरूरी है ताकि उन्हें मछली पालन के कामें ज्यादा से ज्यादा कमाई करने का मौका मिल सके. यही वजह है कि बिहार में मछली पालकों को मछली पालन की आधुनिक तकनीक सीखने के लिए सरकार की तरफ से दूसरे राज्य में भेजा गया है.
ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेजा गया
असल में मछली पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में गोपालगंज जिले ने एक अहम कदम उठाया है.
जिले के 30 चयनित मत्स्य पालक उन्नत प्रशिक्षण हासिल करने के लिए कोलकाता रवाना हो गए हैं, जहां उन्हें वैज्ञानिक एवं आधुनिक मछली पालन की बारीकियां सिखाई जाएंगी.
जिला मत्स्य कार्यालय, गोपालगंज के तत्वावधान में यह प्रशिक्षण 18 मार्च से 24 मार्च तक केंद्रीय मत्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता में आयोजित होगा.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मछली उत्पादन बढ़ाने, रोग नियंत्रण, फीड प्रबंधन, तालाब प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जाएगी.
सभी प्रशिक्षणार्थी 17 मार्च को पूर्वांचल एक्सप्रेस से कोलकाता के लिए रवाना हुए. इस प्रशिक्षण दल का नेतृत्व मत्स्य विकास पदाधिकारी आयुषी कुमारी कर रही हैं.
जिन्हें प्रतिभागियों को सुरक्षित रूप से प्रशिक्षण स्थल तक पहुंचाने और पूरे कार्यक्रम के समुचित संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
मत्स्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से जिले के मत्स्य पालकों को न सिर्फ नई तकनीकी जानकारी मिलेगी.
बल्कि वे इसे अपने क्षेत्र में लागू कर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकेंगे.
निष्कर्ष
ये पहल राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और मत्स्य पालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. ताकि मछली पालकों और ज्यादा फायदा मिल सके.












