Home पशुपालन Biogas Plant: 1,040 घरेलू स्तर के फ्लेक्सी बायोगैस प्लांट लगाने से कम हुई एलपीजी पर निर्भरता
पशुपालन

Biogas Plant: 1,040 घरेलू स्तर के फ्लेक्सी बायोगैस प्लांट लगाने से कम हुई एलपीजी पर निर्भरता

कार्यक्रम में शामिल हुए एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन के साथ मिलकर, बेंगलुरु में NDDB–SPEF प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के तहत खाद और डेयरी वैल्यू चेन से जुड़े उपायों पर एक क्षेत्रीय हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया. इस वर्कशाप में दूध संघों, दूध उत्पादक कंपनियों, महासंघों और संबंधित संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. अपने शुरुआती संबोधन में, NDDB के SGM डॉ. वी. श्रीधर ने (जिन्होंने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला को संबोधित किया) जैविक खाद, सौर ऊर्जा और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) जैसे चक्रीय तरीकों के जरिए ‘नेट जीरो’ डेयरी की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया.

NDDB की क्षेत्रीय प्रमुख (SR) रोमी जैकब ने स्थिरता के लिए खाद वैल्यू चेन से जुड़े उपायों और साझेदारियों के महत्व को रेखांकित किया. NDDB के IPM सेल के वरिष्ठ प्रबंधक श्री विनय ए. पटेल और SPEF के श्री धर्मेंद्र कुमार ने पहले चरण से मिली सीखों को साझा किया.

एलपीजी की खपत में आई है कमी
उन्होंने सात राज्यों के नौ स्थानों पर 1,040 घरेलू स्तर के फ्लेक्सी बायोगैस संयंत्रों की स्थापना पर प्रकाश डाला.

जिसके नतीजे में एलपीजी की खपत में कमी आई है. किसानों की आय में वृद्धि हुई है, कार्बन उत्सर्जन कम हुआ और बायो-स्लरी के माध्यम से मूल्य सृजन हुआ.

इस पहल के तहत कार्बन क्रेडिट तंत्र भी शुरू किए गए और ज़कारियापुरा मॉडल महिला सहकारी समिति को भी प्रदर्शित किया गया.

एक अन्य सत्र में, NDDB के सलाहकार डॉ. के. पी. पटेल (जो वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे) ने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार पर जोर दिया.

साथ ही रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बायोगैस स्लरी-आधारित जैविक खादों के महत्व पर जोर दिया.

इस कार्यशाला में खाद वैल्यू चेन (MVC) पहल के दूसरे चरण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। इसे श्री राहुल राठौड़ (PMU, SPEF–NDDB) ने प्रस्तुत किया.

जिसमें बायोगैस संयंत्रों, स्लरी प्रसंस्करण केंद्रों, समुदाय-आधारित मॉडलों और कार्बन क्रेडिट के एकीकरण के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया.

NDDB के IPM सेल के प्रबंधक श्री प्रकाश पांचाल ने भी डेयरी वैल्यू चेन से जुड़े प्रमुख उपायों को प्रस्तुत किया.

इनमें दूध संग्रह केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, मोबाइल दूध संग्रह इकाइयों के माध्यम से खरीद और छोटे पैमाने की दूध प्रसंस्करण इकाइयां शामिल थीं, जिनका उद्देश्य विकेंद्रीकृत मूल्य संवर्धन और परिचालन दक्षता को बढ़ावा देना है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालन

Animal News: जानवरों की इमरजेंसी देखभाल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन जिंदगी बचाना वाला है उपाय

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने...

careerपशुपालन

RAJUVAS: वेटरनरी यूनिवर्सिटी की परीक्षा 12 जुलाई को, प्री-पीजी के माध्यम से होगा इम्तिहान

नई दिल्ली. राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS) में प्रवेश का...

animal husbandry
पशुपालनसरकारी स्की‍म

Scheme: नस्ल सुधार के लिए बकरी पालकों को बकरा दे रही है सरकार

नई दिल्ली. राजस्थान सरकार की तरफ से पशुपालन को बढ़ावा देने के...