नई दिल्ली. गर्मी का मौसम तेजी के साथ आ रहा है. दोपहर के समय तो धूप में तेजी है और इससे गर्मी का अहसास भी हो रहा है. मार्च का महीना भी आधे से ज्यादा गुजर चुका है और अप्रैल से जून ज्यादा गर्मी पड़ती है. ऐसे में न सिर्फ इंसानों बल्कि जानवरों को भी परेशानी होती है. उन्हें गर्मी लगती है तो कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. खासतौर पर डेयरी फार्मिंग में इस्तेमाल होने वाले पशुओं को गर्मी की वजह से ज्यादा परेशानी होती है और इसके चलते उनके उत्पादन पर भी बहुत ज्यादा असर पड़ता है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में बेहद जरूरी है कि पशु दूध का उत्पादन अपनी क्षमता के मुताबिक करता रहे. क्योंकि इस काम में नफा और नुकसान इसी बात पर टिका होता है कि पशु का दूध उत्पादन कितना हो रहा है. जबकि गर्मी पशुओं के दूध उत्पादन को कम करने में सबसे अहम है. गर्मियों में दूध का उत्पादन कम होना लाजिमी है. गौरतलब है कि गर्मी (अप्रैल-जून) में 2-4 लीटर तक दूध कम होना आम है. हालांकि आप कारण को समझेंगे तो इस नुकसान को रोक पाएगे. इसलिए आइए हम यहां आपको बताते हैं कि गर्मी में पशु के दूध का उत्पादन किस वजह से कम हो जाता है.
हीट स्ट्रेस (Heat Stress)
जब तापमन 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो तो दूध उत्पादन घट जाता है.
क्योंकि इस स्थिति में पशु हांफने लगता है.
पशु ज्यादा पानी पीता है. जबकि चारा कम खाता है.
जिसका सीधा मतलब है कि चारा कम तो दूथ भी कम.
भूख कम लगना
गर्मी में पशु सूखा चारा कम खाते हैं.
पशु को दाना पचने में दिकक्त होती है.
पशु की जुगाली घट जाती है.
एनर्जी की कमी से दूध घट जाता है.
पानी की कमी
एक दुधारू पशु को 60-80 लीटर पानी प्रति दिन चाहिए होता है.
पानीं गर्म हो तो पशु कम पानी पीते हैं.
शेड की खराव व्यवस्था
पशु को हवा न लगना नुकसान पहुंचाता है.
टीनशेड़ की गर्मी से पशु परेशान हो जाते हैं.
जबकि शेड में भीड़ ज्यादा होने से भी दिक्कत आती है.
दूध उत्पादन में कमी रोकने का क्या है समाधान
शेड में पंखा, कूलर और फांगिग सिस्टम को इंस्टॉल करें.
दोपहर में ठंडा पानी दिन में 3-4 बार बदलें
इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल मिक्सचर भी खिलाएं
हरा नरम चारा पशुओं को खिलाएं
दाना सुबह-शाम ठंडे समय पर दें.












