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Fisheries Sector: 300 से ज्यादा मछली पालन के स्टार्टअप्स आए सामने, फिश फार्मर्स को मिला है फायदा

केज मछली पालन में जगह का चुनाव बेहद अहम होता है. ऐसी जगह पर केज सेटल करना चाहिए जहां पानी की गहराई कम से कम 6 मीटर या उससे ज्यादा हो.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. भारत के आर्थिक परिदृश्य में मछली पालन क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण है. यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में योगदान देने के साथ-साथ तटीय, अंतर्देशीय और ग्रामीण समुदायों में लाखों लोगों की इनकम का आधार भी है. हाल के वर्षों में, उत्पादन पर आधारित इस क्षेत्र में नई तकनीक के साथ उद्यमशीलता की प्रतिभाएं आने लगी हैं, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स का एक बढ़ता हुआ परितंत्र विकसित हो रहा है. वर्ष 2015 से, सरकार ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलों और योजनाओं के माध्यम से 39 हजार 272 करोड़ रुपये का निवेश किया है.

मत्स्य पालन क्षेत्र में तेजी से हो रहे इस विस्तार की वजह से 300 से अधिक मत्स्य पालन स्टार्टअप्स सामने आए हैं, जो उत्पादकता बढ़ाने, और मूल्य श्रृंखला दक्षता में सुधार करने वाले नवीन, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करने के लिए ब्लॉकचेन, आईओटी और एआई का लाभ उठा रहे हैं.

नई टेक्नोलॉजी ने किया समाधान
नई टेक्नोलॉजी समाधानों के माध्यम से मत्स्य पालन की मूल्य श्रृंखला चुनौतियों का समाधान करने के लिए समस्या कथनों का एक समूह निर्धारित किया गया है.

इससे टिकाऊ स्रोतों से पौष्टिक और किफायती जलीय कृषि फ़ीड विकसित करने, एआई-संचालित सटीक खेती के माध्यम से जलीय कृषि स्थिरता बढ़ी है.

इससे लचीली और समावेशी समुद्री खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करने, समुद्री खाद्य उद्योग में मूल्य को अधिकतम करते हुए अपशिष्ट कम किया गया है.

टेक्नोलॉजी के समावेश से देश के मत्स्य पालन स्टार्टअप परिदृश्य में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिससे मूल्य श्रृंखला में दक्षता, स्थिरता और बाजार पहुंच में सुधार हो रहा है.

स्टार्टअप जल गुणवत्ता निगरानी, ​​तालाब स्वास्थ्य प्रबंधन और वास्तविक समय पर्यावरणीय विश्लेषण के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) समाधानों को एकीकृत कर रहे हैं. जिससे इनपुट लागत कम हो रही है और सटीक मत्स्य पालन संभव हो रहा है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) उपकरणों का उपयोग रोगों को लेकर पूर्वानुमान, बायोमास अनुमान, फ़ीड अनुकूलन और निर्णय-सहायता प्रणालियों के लिए तेजी से किया जा रहा है, जो किसानों को जोखिमों से निपटने और उपज में सुधार करने में मदद करते हैं.

आरएएस और बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकी और सेंसर-आधारित कृषि प्रबंधन प्रणालियों में नवाचार उच्च घनत्व, कम पानी और पर्यावरण-नियंत्रित खेती को सक्षम बना रहे हैं, जिससे संसाधन-सीमित क्षेत्रों में भी उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है.

भारत सरकार स्टार्ट-अप्स को कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, सौर ऊर्जा से चलने वाली चिलिंग यूनिट्स, स्मार्ट आइस-प्रोडक्शन सिस्टम और एआई-आधारित गुणवत्ता ग्रेडिंग में प्रगति के लिए प्रोत्साहित कर रही है.

ताकि किसी तरह की बर्बादी को कम किया जा सके और निर्यात लायक मानकों को बनाए रखा जा सके.

Written by
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