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Animal News: तेज धूप में पशुओं को तालाब तक ले जाकर नहलाने से इसका फायदा हो जाता है खत्म

तलाब में नहाती भैंसें.

नई दिल्ली. पर्यावरण के तापमान में बढ़ोतरी से दुधारू पशुओं पर बहुत ज्यादा तनाव पड़ता है. ज्यादा तापमान की वजह से पशुओं का दूध उत्पादन कम हो जाता है, क्योंकि वे कम चारा खाते हैं और उन पर गर्मी का बोझ बढ़ जाता है. ये कहना है गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना में पशु उत्पादन प्रबंधन विभाग के प्रमुख डॉ. यशपाल सिंह का. उन्होंने कहा कि चिलचिलाती गर्मी के कारण, सही आश्रय और आवास प्रबंधन, पानी का इस्तेमाल, खान-पान में बदलाव, निवारक स्वास्थ्य प्रबंधन आदि कुछ ऐसी तकनीकें हैं जिनसे गर्मी के तनाव के असर को कम किया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि दुधारू पशुओं के लिए हवादार शेड होने चाहिए, जहाँ उनके खड़े होने और आराम करने के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए. शेड के खुले सिरे को बांस की चटाई, जूट या पर्दों से ढक देना चाहिए. शीट वाली छत को भी घास-फूस से ढका जा सकता है, या छत के ऊपरी हिस्से को सफ़ेद रंग से और अंदरूनी हिस्से को गहरे रंग से रंगा जा सकता है.

गर्मी में होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए करें ये काम
पशु को गर्मी में होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए शेड के चारों ओर, खासकर दक्षिणी दीवार या सीमा पर, छायादार पेड़ लगाने चाहिए ताकि और ज्यादा ठंडक मिल सके.

चूंकि गर्मियों में पानी सबसे जरूरी चीज है, इसलिए इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए. नहीं तो पशुओं को परेशानी हो सकती है.

दिन के सबसे गर्म समय (सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक) में शेड के अंदर पशुओं पर 3-4 बार पानी छिड़कने, फुहार डालने या फॉगिंग करने से गर्मी का बोझ कम होता है और वाष्पीकरण से होने वाली ठंडक के कारण उत्पादकता बढ़ती है.

ये तरीके भैंसों के लिए ज्यादा असरदार होते हैं, क्योंकि गायों की तुलना में उनके शरीर पर पसीने की ग्रंथियां कम होती हैं.

बहुत ज्यादा गर्मी के मौसम में (सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच) पशुओं को साफ पानी के तालाबों में नहलाना चाहिए.

तालाब में नहलाने की व्यवस्था फ़ार्म पर ही होनी चाहिए, क्योंकि तेज धूप में पशुओं को तालाब तक ले जाने से नहलाने का फायदा खत्म हो जाता है.

बड़े-बड़े कमर्शियल डेयरी फ़ार्मों पर, बहुत ज़्यादा गर्मी होने पर पंखे, गीले पर्दे या पैनल, एयर कूलर या एयर कंडीशनर जैसे अलग-अलग कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

पशुओं को पीने के लिए भरपूर मात्रा में ताज़ा, ठंडा और साफ़ पानी (अक्सर गांवों में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के घड़ों में रखा हुआ) उपलब्ध कराने से भी गर्मी का बोझ कम करने में मदद मिलती है.

पशुओं के लिए किसी सुविधाजनक जगह पर, पर्याप्त संख्या में, छायादार पानी के कुंड (water troughs) उपलब्ध कराए जाने चाहिए. यदि ये काम आप करते हैं तो पशुओं से बेहतर उत्पादन ले सकते हैं.

Written by
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