Home डेयरी Dairy Goat: एंग्लो-न्युबियन बकरी की क्या है खासियत, कैसे करें इसका पालन, पालने के क्या हैं फायदे
डेयरी

Dairy Goat: एंग्लो-न्युबियन बकरी की क्या है खासियत, कैसे करें इसका पालन, पालने के क्या हैं फायदे

एंग्लो-न्युबियन बकरी.

नई दिल्ली. एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी पालन एक बेहतरीन काम है और इसे करके अच्छी कमाई की जा सकती है. अगर आप बकरी पालन करना चाहते तो हैं तो कई ऐसी ब्रीड है, जिनका चयन करके आप लाखों रुपए कमा सकते हैं. उसी में से एक ब्रीड एंग्लो-न्युबियन है. ये एक ऐसी नस्ल की बकरी है जो अपने ज्यादा फैट वाले दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. इसके दूध से मक्खन तैयार किया जा सकता है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह एक दोहरे उद्देश्य वाली नस्ल है, जिसका उपयोग मांस और दूध दोनों के लिए किया जाता है.

अगर आप बकरी पालन करना चाहते हैं तो एंग्लो-न्युबियन बकरियां जो अपने उच्च वसा वाले दूध के लिए जानी जाती हैं और गर्मी के प्रति भी सहनशील होती हैं, उने पाल सकते हैं. यहां नीचे उनके बारे में कुछ अहम जानकारी दी जा रही है, जो आपकेे काम की हो सकती है, पूरा और गौर से पढ़ें.

एंग्लो-न्युबियन डेयरी बकरी के बारे में जानें यहां
पोषण:

  • संतुलित आहार: विटामिन, खनिज और प्रोटीन से भरपूर आहार सुनिश्चित करें. अल्फाल्फा या तिपतिया घास जैसे उच्च गुणवत्ता वाले चारे के साथ-साथ मकई या जौ जैसे अनाज दूध की पैदावार को बढ़ा सकते हैं.
  • ताजा पानी: हाइड्रेशन के स्तर को बनाए रखने और ज्यादा दूध उत्पादन के लिए हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं.
  • पूरक आहार: बकरियों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरक आहार में खनिज पूरक और विटामिन आदि देना चाहिए.

प्रजनन

  • उच्च उत्पादन वाली नस्लों का चयन करें: अल्पाइन बकरियां अपने उच्च दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं. सुनिश्चित करें कि आप दूध की पैदावार को बनाए रखने और सुधारने के लिए सबसे अच्छा प्रजनन स्टॉक चुनें.
  • उचित प्रजनन प्रथाएं: लगभग 7-10 महीने में प्रजनन करें और तय करें कि वे प्रजनन क्षमता और दूध उत्पादन को अधिकतम करने के लिए अच्छे स्वास्थ्य में हैं.

दूध लेने के लिए क्या करें

  • लगातार दूध देने का शेड्यूल: दूध उत्पादन के स्तर को बनाए रखने के लिए नियमित दूध देने के शेड्यूल का पालन करें.
  • स्वच्छता: संदूषण को रोकने और उच्च गुणवत्ता वाले दूध को सुनिश्चित करने के लिए दूध दुहने के दौरान स्वच्छता बनाए रखें.

बीमारी को कैसे रोकें
जैव सुरक्षा:- बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए झुंड में शामिल करने से पहले कम से कम 30 दिनों के लिए नए जानवरों को अलग रखें.

  • क्वारेंटाइन: नए जानवरों को अलग करें और बीमारी के किसी भी लक्षण के लिए उनका निरीक्षण करें.
  • स्वच्छ वातावरण: रहने के क्षेत्र को साफ रखें और नियमित रूप से उपकरण और भोजन क्षेत्रों को कीटाणुरहित करें.

टीकाकरण करें और कृमिनाशक दवा पिलाएं

  • टीकाकरण: बकरियों को आम बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करें.
  • कृमि मुक्ति: पेट के अंदर के कीड़ों को खत्म करने के लिए बकरियों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दें.

स्वास्थ्य निगरानी:

  • नियमित जांच: बकरियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए नियमित पशु चिकित्सा जांच का समय निर्धारित करें.
  • प्रारंभिक पहचान: बीमारी के संकेतों के प्रति सतर्क रहें और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए किसी भी मुद्दे का तुरंत समाधान करें.

परजीवी नियंत्रण:

  • चारागाह प्रबंधन: कीड़ों से होने वाले संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए चारागाहों को घुमाएं और अधिक पशु रखने से बचें.
  • मल अंडों की गिनती: कीड़ों की निगरानी करने और उसके अनुसार कृमि मुक्ति प्रथाओं को समायोजित करने के लिए नियमित रूप से मल अंडों की गिनती करें.
Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

डेयरी

MP Dairy Sector: डेयरी सेक्टर में बड़ा निवेश लाने की तैयारी, दूध उत्पादकों की बढ़ाई जाएगी आमदनी

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय पशुपालक...

भैंस को दिन में दो-तीन बार नहलाना चाहिए.
डेयरी

Dairy: डेयरी सेक्टर में हर साल 6.82 फीसद की तेजी से बढ़ रहा है लद्दाख

नई दिल्ली. पिछले दिनों लद्दाख में एनडीडीबी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में...