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Goat Farming: बिहार में गोट सीमेन स्टेशन की होगी स्थापना, उन्नत नस्ल की बकरियों की बढ़ेगी संख्या

कीड़े बकरे के पेट में हो जाएं तो उसकी ग्रोथ रुकना तय है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. सरकार का ये मानना है कि किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए उन्हें पशुपालन के लिए प्रेरित करना जरूरी है. क्योंकि कृषि के साथ किसान पशुपालन आसानी से कर सकते हैं और इससे उनकी इनकम भी बढ़ सकती है. इसलिए सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किया जा रहा है कि ज्यादा से ज्यादा किसान पशुपालन के काम में आग आएं. चाहे किसान गाय, भैंस पाले या फिर भेड़—बकरी सभी से उन्हें फायदा हो सकता है. इसलिए कई योजनाएं भी चलाई जा रही हैं ताकि उसकी मदद से किसानों को पशुपालन के काम से जोड़ा जाए.

वहीं सरकार कुछ ऐसे काम भी कर रही हैं, जिससे देश में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या भी बढ़ जाए ताकि किसानों के पास जो भी जानवर हों वो बेहतर उत्पादन कर सकें. जब जानवर उन्नत नस्ल के होंगे तो वो बेहतर उत्पादन करेंगे. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. इस साल के बजट में पशुपालन के लिए हजारों करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. वहीं बिहार सरकार भी बजट का फायदा उठाते हुए राज्य में गोट सीमेन सेंटर खोलना चाहती है ताकि बेहतर क्वालिटी बकरियों से राज्य के पशुपालकों को फायदा हो सके.

मीट एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
गौरतलब है कि पशुपालन के क्षेत्र में बिहार की प्रगति बेहद ही अच्छी है. इसे और गति देने के उद्देश्य से सरकार चाहती है कि राज्य में उन्नत नस्ल की बकरियां तैयार हों.

ताकि अपनी आवश्यकता के साथ मीट निर्यात का रास्ता आसान हो सके. इसके लिए गोट सीमेन स्टेशन की स्थापना होगी.

बजट में इसका उल्लेख है. इस स्टेशन के जरिए उन्नत नस्ल के बकरों के सीमेन से सीमेन स्ट्रा तैयार कर बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान होगा.

इसके अलावा पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत वन हेल्थ प्लेटफार्म की स्थापना को स्वीकृति दी गई है.

इसके जरिए पशुओं में जुनोटिक तपेदिक, ब्रुसेलोसिस, रेबीज आदि रोगों की पहचान और चिकित्सा हो सकेगी.

वहीं सरकार ने बकरी विकास योजना को और गति देने का निर्णय लिया है. इसके अंतर्गत बकरी प्रजनन, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना होगी.

बकरी फेडरेशन का भी गठन होना है. सरकार बकरी पालन के अलावा शूकर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य शूकर प्रजनन, अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान की भी स्थापना करेगी.

इसके अलावा राज्य के हर गांव में सुधा बिक्री केंद्र खोला जाएगा और 50 किलोलीटर प्रतिदिन की क्षमता वाले मधेपुरा शीतक केंद्र की स्थापना का काम नए वित्तीय वर्ष में पूरा हो जाएगा.

Written by
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