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Animal News: स्लाटर हाउस से ​जानवरों की कटिंग के बाद निकलने वाले बाई प्रोडक्ट का क्या इस्तेमाल होता है

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मार्डन स्लाउटर हाउस और मीट की प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. शायद आपको ये मालूम न हो कि स्लाटर हाउस से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट का इस्तेमाल न सिर्फ ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में होता है बल्कि पालतू जानवरों के खाने की चीजों ओर दवाओं में भी होता है. दरअसल, लाभकारी बाजार की कमी के कारण डाउनग्रेड किए जाते हैं और पालतू खाद्य, जानवरों के खाने, औषधियों और कॉस्मेटिक्स के रूप में उपयोग किए जाते हैं. चूंकि कई उपउत्पाद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं, इसलिए उन्हें पालतू भोजन और जानवरों के खाने के रूप में उपयोग करना आर्थिक रूप से फायदेमंद होता है.

गैर इस्तेमाल बाई प्रोडक्ट को आटे में बनाया जाता है और इन्हें मवेशियों, पोल्ट्री और पालतू जानवरों के लिए खाने की सामग्रियों के रूप में उपयोग किया जाता है. इस प्रकार, मीट और बोन मील जानवरों को प्रोटीन और फॉस्फोरस का आदर्श संयोजन प्रदान करता है. जानवरों के प्रोटीन के संश्लेषण के लिए जानवरों के टिश्यू आधारित भोजन का सेवन करना अमीनो एसिड संतुलन को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट रूप से फायदेमंद है.

मुर्गे का बाई प्रोडक्ट इस काम में आता है
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई एकीकृत स्लाटर हाउस में, भैंस के बाई प्रोडक्ट जैसे फेफड़े, दिल, पेट को सुखाकर पालतू भोजन के उत्पादन के लिए निर्यात किया जाता है. भारत में, क्योंकि ज्यादातर पालतू जानवरों के मालिक मांस उत्पादों के प्रति संवेदनशील होते हैं, पालतू भोजन मुर्गी के उप-उत्पाद जैसे सिर, पांव, आंत आदि से बनाया जाता है. आगे, चिकन उद्योग के कचरे का उपयोग मछलियों को खिलाने के लिए किया जाता है. ये मछलियों के लिए एक पौष्टिक फीड होता है. इससे लिए को काफी फायदा होता है और उनकी ग्रोथ भी बढ़ती है.

विदेशों में ब्लड से ​बनता है प्रोडक्ट
वहीं जबकि स्लाटर हाउसे से जानवरों की कटिंग के बाद निकलने वाले खून को एक ऐसा गैर-खाद्य उप-उत्पाद माना जाता है. बता दें कि इसका हमारे देश में कम उपयोग किया जाता है. बता दें ​विदेशों में जानवरों के खून से विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे चॉकलेट, कुकीज़, सॉसेज, पेय, गमियां, एक्सट्रूडेड उत्पादों के निर्माण में किया जाता है और पोषण संबंधी पूरक के रूप में सीधे सेवन किया जाता है. हालांकि कुछ मात्रा में स्थिर रक्त को मांस और हड्डी के आटे के उत्पादन में जोड़ा जाता है, लेकिन इसके गहरे रंग और खराब पाचनता के कारण इसका उपयोग सीमित है. बाई प्रोडक्ट के रेंडरिंग से प्राप्त टैलो मुर्गी और पशु आहार में ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग किया जाता है.

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