नई दिल्ली. इन्दौर सहकारी दुग्ध संघ के 30 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के पाउडर प्लांट का वर्चुअल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया. बता दें कि भारत सरकार की नेशनल प्रोग्राम फार डेयरी डेवलपमेंट योजना के घटक ‘सहकारी समितियों के माध्यम से डेयरी’ के तहत ‘दूध पाउडर प्लांट’ परियोजना की कुल लागत 76.50 रूपए करोड़ है. जिसमें 29.50 करोड़ रुपए की एनडीडीबी के माध्यम से एनपीडीडी काॅमपोनेन्ट-बी, डीटीसी-जापान इंटरनेशनल कार्पोरेशन एजेन्सी, भारत सरकार की योजना के द्वारा सहायता की गई है और बाकी राशि इन्दौर सहकारी दुग्ध संघ के खुद के सोर्स से की गई है.
इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी उपस्थित रहे. वहीं मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट, एमपीसीडीएफ भोपाल के प्रबंध संचालक डाॅ. संजय गोवाणी ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से पीएम धन धान्य योजना के उद्घाटन कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए. जबकि पशुपालन एवं डेयरी विभाग के मंत्री लखन पटेल और इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के सीईओ बलवीर शर्मा भी मौजूद रहे.
कितनी मात्रा में बनेगा मिल्क पाउडर
बता दें कि प्लांट 76.50 करोड़ की लागत से बना है. प्लांट की स्थापना का काम भारत सरकार की कंपनी मेसर्स हिंदुस्तान मशीन टूल्स से कराया गया है.
इस प्लांट के माध्यम से होल मिल्क पाउडर, स्किम मिल्क पाउडर तथा डेयरी व्हाईटनर इत्यादि निर्मित किए जाएंगे.
यह दूध पाउडर प्लांट, स्काडा (प्लांट पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) आटोमेटिक है, यह कंप्यूटर आधारित प्रणाली है.
इसका उपयोग औद्योगिक उपकरणों और प्रक्रियाओं की निगरानी करने, डेटा एकत्र करने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.
जिसमें प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध से लगभग 30 मीट्रिक टन प्रति दिन दूध पाउडर का निर्माण किया जाएगा. फ्लश सीजन में प्रतिदिन बचे रहने वाले दूध का पूरा उपयोग होगा.
इससे अधिक से अधिक मात्रा मे किसानों से दूध खरीदा जा सकेगा. वहीं बचे दूध का निस्तारण किया जाएगा. जिससे दुग्ध उत्पादक किसानों की आय मे वृद्वि होगी.
प्रधानमंत्री ने दी ये भी सौगात
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्चुअल उपस्थित में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की गई.
एआईएफ के अंतर्गत 1068 परियोजनाएं, पशुपालन क्षेत्र के अंतर्गत 18 परियोजनाएं, मत्स्य पालन क्षेत्र के अंतर्गत 09 परियोजनाएं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के अंतर्गत 16 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया.
पशुपालन क्षेत्र के अंतर्गत 01 परियोजना, मत्स्य पालन क्षेत्र के अंतर्गत 07 परियोजनाएं, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अंतर्गत 01 परियोजना का शिलान्यास किया.












