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FSSAI ने दूध में मिलावटखोरी रोकने को उत्पादन व बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन कराना व लाइेंसस लेना किया जरूरी

The revised NPDD will give an impetus to the dairy sector by creating infrastructure for milk procurement
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दूध में मिलावट को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए एफएसएसआई ने अनिवार्य पंजीकरण या लाइसेंस लेना जरूरी कर दिया है. आपको बता दें कि ये नियम सीधे बेचने वाले या स्वतंत्र दूधियों और छोटे डेयरी फार्मो पर लागू होगा. बताया जा रहा है कि 12 लाख रुपए से कम टर्नओवर वालों को बेसिक रजिस्ट्रेशन कराना होगा. जबकि उससे ज्यादा पर लाइसेंस अनिवार्य होगा. हालांकि जो किसान रजिस्टर्ड सहकारी समितियां जैसे अमूल और मदर डेयरी आदि से जुड़े हुए हैं. उन्हें अलग से लाइसेंस बनवाने की जरूरत नहीं होगी.

कार्यकारी निदेशक (नियामक अनुपालन) डॉ. सत्येन कुमार पंडा ने बताया कि ये बात संज्ञान में आई है कि कुछ दुग्ध उत्पादक (जो डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य नहीं हैं) और दूध विक्रेता खाद्य व्यवसाय गतिविधियों का संचालन बिना पंजीकरण कराए अथवा बिना लाइसेंस प्राप्त किए कर रहे हैं. इसलिए सभी दूध उत्पादकों जो सहकारी समितियों अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड नहीं है और दूध की बिक्री करते हैं तो उन्हें अपना संचालन शुरू करने या जारी रखने से पहले अनिवार्य रूप से एफएसएसएआई के साथ अपना पंजीकरण कराना होगा.

एफएसएसआई का पूरा निर्देश क्या है
कहा कि सभी राज्यों/संघ राज्य को निर्देश दिया गया कि वे दूध में संभावित मिलावट से संबंधित हाल की घटनाओं के तहत रजिस्ट्रेश व लाइसेंस बनवाने को कड़ाई से सुनिश्चित कराएं.

केंद्र तथा सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की प्रवर्तन प्राधिकरणों से अनुरोध है कि वे संबंधित अधिकारियों/केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरणों तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित करें.

वो सत्यापित करें कि ऐसे सभी दूध उत्पादकों एवं दूध विक्रेताओं के पास वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र अथवा लाइसेंस उपलब्ध हो.

इसके अलावा ये भी कहा कि दूध चिलर्स (जो दुग्ध उत्पादकों/दूध विक्रेताओं द्वारा उपयोग किए जाते हैं) का समय-समय पर निरीक्षण किया जाए.

ताकि उचित भंडारण तापमान सुनिश्चित हो सके तथा चिलर की आवश्यक शर्तों का हर समय पालन हो, जिससे दूध के खराब होने की संभावना को रोका जा सके.

जबकि लोगों की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इसका पालन न करने के मामलों में भी एफएसएसआई कार्रवाई कर सकता है.

राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को ये निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं.

ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी दूध उत्पादकों जो डेयरी सहकारी समिति के सदस्य नहीं हैं तथा दूध विक्रेताओं के पास लागूतानुसार आवश्यक एफएसएसएआई पंजीकरण प्रमाणपत्र या लाइसेंस बनवा लें.

बताते चलें कि एफएसएसएआई द्वारा पहले भी 16 दिसंबर 2025 को अभियान चलाने क संबंध में जानकारी दी गई थी. वहीं कार्रवाई की रिपोर्ट हर महीने की 15 और 30 या 31 तारीख तक बिना किसी चूक के एफएसएसआई से साझा करनी होगी.

Written by
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