नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग का बिजनेस वैसे तो बहुत अच्छा है और इसमें खूब कमाई भी होती है लेकिन एक बार अगर डेयरी पशु की तबीयत खराब हो जाए तो फिर उत्पादन पर सबसे पहला असर पड़ता है. जिसके चलते पशु दूध का उत्पादन कम कर देते हैं और डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में पशुपालक को नुकसान होने लगता है. एक्सपर्ट का कहना है कि सबसे ज्यादा दूध उत्पादन पर असर बीमारियों की वजह से ही पड़ता है. इसलिए पशु को बीमारी से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करना चाहिए. तभी डेयरी फार्मिंग के काम में फायदा होगा.
बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से डेयरी पशुओं की कुछ बीमारियों और उसके इलाज के संबंध में देसी इलाज बताए गए हैं. यदि आप उनके बारे में जानना चाहते हैं तो लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज के इस आर्टिकल को पूरा और गौर से पढ़ें, ताकि पशु को बीमारियों से दूर रख सकें जिससे उत्पादन पर असर न पड़े.
जड़ी-बूटियों से कैसे होगा इलाज
पशुओं को पेट संबंधित कई समस्याएं होती हैं. अगर आप उन्हें हरण देते हैं तो इससे उनका पेट साफ रहता है.
पशुओं के पाचन क्रिया और एंजाइम को सही रखने के लिए सोंठ का इस्तेमाल किया जा सकता है.
वहीं दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए साथ ही पशुओं को उठने बैठने में दिक्कत आ रही है तो अश्वगंधा देना चाहिए.
सनाय की पत्ती में भूख कब्ज को खत्म करने की शक्ति है. इस तरह की दिक्कत आए तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
बायबडंग सभी तरह के पेट के कीड़े मारने के लिए बहुत ही अच्छा होता है. अगर आप इसका इस्तेमाल करते हैं तो ये डीवार्मिंग का काम करेगा.
वहीं काला जीरा भूख बढ़ाने या पेट के कीड़े खत्म करने के लिए बेहद ही कारगर है.
जबकि लौन्ग डंडी और काला नमक पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए फायदेमंद होता है. इससे पशु जो कुछ भी खाता पीता है, वह उसे आसानी से पच जाता है.
निष्कर्ष
यदि आप इन जड़ी-बूटियां का इस्तेमाल करते हैं तो पशुओं को बीमारियों से बचा सकते हैं और इससे उत्पादन भी बेहतर मिलेगा.












