नई दिल्ली. देश में श्वेत क्रांति को नई ऊंचाई देने वाली एक ऐतिहासिक उपलब्धि हरियाणा के हिसार में हासिल की गई है. असल में केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआइआरबी) के वैज्ञानिकों ने ‘हिसार गौरव 2.0’ नामक क्लोन झोटे का कामयाबी के साथ विकास कर देश के पशुधन विज्ञान में नया मानक स्थापित करने का काम किया है. बता दें कि 28 नवंबर 2025 को जन्मा ये क्लोन देश के टॉप कैटेगरी के प्रोजेनी टेस्टेड झोटे की कोशिकाओं से विकसित किया गया है. ये केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि भारत की दूध उत्पादन क्षमता को लंबे समय के लिए मजबूती देने वाला निर्णायक कदम है.
ये उपलब्धि वैज्ञानिक प्रयोगशाला की सीमा में सिमटी नहीं है. इसका सीधा फायदा देश के किसानों और डेयरी सेक्टर से जुड़े लोगों को होगा. क्लोन तकनीक के माध्यम से अब उच्च उत्पादक पशुओं का श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे दूध उत्पादन में लगातार इजाफा होगा. साथ ही भारत दुनियाभर में दूध उत्पादन में अपनी पहली पोजिशन और मजबूत करेगा.
इस टेस्ट से भी गुजारा गया
वैज्ञानिक डा. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि ‘हिसार गौरव 2.0’ उसी डोनर झोटे की कोशिकाओं से विकसित किया गया है.
इसकी जैविक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक पेरेंटेज परीक्षण कराया गया, जिससे यह प्रमाणित हुआ कि क्लोन पूरी तरह शुद्ध और विश्वसनीय है.
इस उपलब्धि में डा. पीएस यादव, डा. मीति पुनेठा, डा. राकेश शर्मा, डा. प्रिया दहिया, मनु मांगल और डा. प्रदीप कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
पंचवर्षीय समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. होन्नप्पागोल ने नवजात क्लोन को देखकर वैज्ञानिकों के कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की.
संस्थान के निदेशक डा. यश पाल शर्मा ने बताया कि इसी बेनर झोटे की कोशिकाओं से वर्ष 2015 में पहला क्लोन ‘हिसार गौरव’ विकसित किया गया था.
वह आज भी पूरी तरह स्वस्थ है और उच्च गुणवत्ता का सीमेन दे रहा है. अब तक उससे 25,000 से अधिक सीमेन डोज तैयार हो चुकी हैं.
जिनके माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में लगभग 600 बछड़े-बछड़ियों का जन्म हो चुका है. यही सफलता ‘हिसार गौरव 2.0’ की मजबूत नींव बनी.










