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Mobile Veterinary Unit: देश में सभी राज्यों में चलेगी मोबाइल वेटरनरी यूनिट, जानिए इसके बारे में

यह योजना देश के पशुपालकों के घर पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई देश में पशुपालकों के लिए अतिमहत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है. इस योजना का लाभ लेने के लिए पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर पशु चिकित्सकों को अपने घर पर बुलाकर निःशुल्क चिकित्सा करवा सकते हैं. यहां तक कि छोटे पशुओं के लिए तो सर्जरी की भी सुविधा वाहन में उपलब्ध रहेगी. इस वाहन में कई प्रकार की दवाइयां उपलब्ध रहती हैं, जो किसानों को निःशुल्क मिलेगी.
चलित पशु चिकित्सा इकाई

भारत सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना चलित पशु चिकित्सा इकाई (Mobile Veterinary Unit) संचालित की जा रही है. इस योजना अंतर्गत भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों को mobile unit के लिए वाहन क्रय की राशि 100 प्रतिशत केन्द्रीय अनुदान पर उपलब्ध कराई गई है. इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष इकाई संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन जिसमें एक पशु चिकित्सक, एक पैरा वेट एवं एक वाहन चालक सह सहायक पदस्थ होता है. इसके लिए पशु औषधि एवं वाहन के रख रखाव और ईंधन के लिए आवश्यक राशि का 60 प्रतिशत भी भारत सरकार द्वारा राज्यों को उपलब्ध कराया जाता है.

योजना का लाभ: यह योजना देश के पशुपालकों के घर पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही है. इस योजना में भारत सरकार द्वारा प्रत्येक एक लाख पशुधन पर एक इकाई स्वीकृत की थी. योजना के त​हत प्रत्येक वाहन को पशु चिकित्सा उपकरणों एवं अन्य आवश्यक चीजों को साथ रखना है. जिसके लिए 16 लाख रुपये प्रति वाहन स्वीकृत किए गए थे. इसी प्रकार संचालन के लिए प्रति वाहन औषधि और ईंधन के लिए भी 35,000 रुपये प्रतिमाह प्रति इकाई और 33,000 प्रतिमाह प्रति इकाई योजना से स्वीकृत हैं. भारत सरकार द्वारा ही चिकित्सक के लिए मानदेय निर्धारित किया गया है. जिसके अंतर्गत पशु चिकित्सक को प्रति माह 56,100 रुपये पैरावेट को 20,000 रुपये और वाहन के ड्राइवर और सह सहायक को राशि 18,000 रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाएगा.

पशुपालक का संतुष्ट होना जरूरी: इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सेवा से पशुपालक संतुष्ट हैं या नहीं. पशुपालकों को वह सारी सुविधाएं मिल रही हैं अथवा नहीं जो की योजना के तहत उनको मिलनी चाहिए. यह संभव नहीं होता कि सभी कॉल करने वाले पशुपालकों से चर्चा करके उनका फीडबैक प्राप्त लिया जा सके इसलिए कोई ऐसा ऐप विकसित किया जाए जिसमें न केवल किये गये कार्य को दर्ज करना आवश्यक हो साथ ही पशुपालक की संतुष्टि भी OTP अथवा किसी अन्य online तकनीक के माध्यम से प्राप्त की जा सके.

एजेंसी निर्धारित की गई: इस प्रक्रिया से संचालन करने पर क्योंकि मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए पृथक से एजेन्सी निर्धारित की गई है, जो की सेवा शुल्क भी प्राप्त कर रही है. उसके द्वारा पूर्ण वेतन भुगतान किया जाना ज्यादा तय होता है साथ ही इकाइयां पूर्णतः विभाग की आधिपत्य में रहती है, तो यह सुनिश्चित किया जा सकता है की किसी भी प्रकार की वेतन में कटौती न हो.

  • ये जरूरी बातें:
    योजना अत्यंत महत्वाकांक्षी है इसलिए प्रस्तावित है कि इसके प्रभावी अनुसरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर National Monitoring Committee का गठन किया जाए जो कि समय-समय पर योजना की समीक्षा करें और आवश्यकता अनुसार संशोधन प्रस्तावित करें.
  • योजना के क्रियान्वयन और लाभ प्राप्त करने विभिन्न Stakholders के Grievance Redressal के लिए एक Grievance Cell गठित किया जाना प्रस्तावित है.
  • 50000 पशुओं पर एक मोबाईल यूनिट का प्रावधान किया जाना चाहिए क्योंकि लगभग 8-9 कॉल प्रतिदिन प्राप्त होते हैं, जिसमें से 4-5 कॉल ही पशु चिकित्सक द्वारा ड्यूटी पर उपचारित किए जा सकते हैं.
  • अमूल मॉडल की सफलता का कारण ही घर पहुंच पशु चिकित्सा और पशुपालन से संबंधित अन्य सेवाएं न्यूनतम शुल्क के माध्यम से संपादित की जा रही हैं.
Written by
Livestock Animal News Team

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