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Nattive Breed Of Gujrat: सिरोही बकरी, गुजरात सुरती बकरी

सिरोही नस्ल की बकरी-बकरा की मार्केट में काफी डिमांड है.
सिरोही बकरी का प्रतीकात्मक फोटो।

नई दिल्ली. भारत में बड़े पैमाने पर बकरी पालन किया जा रहा है. बकरी पालन से लोग जुड़कर लाखों में कमा रहे हैं. बहुत से ऐसे किसान हैं, जिनके शेड में सैकड़ों की संख्या में बकरों-बकरी हैं और उनकी कमाई करोड़ों में भी होती है. बकरियों में सिरोही नस्ल भी प्रमुख होती है. वैसे तो ये एक मध्यम आकार की बकरी है लेकिन इसका पालन किसान मीट और दूध उत्पादन दोनों के लिए करते हैं. आज हम बात कर रहे हैं गुजरात और राजस्थान में पाई जाने वाली बकरी की ऐसी नस्ल की जो बहुत फेमस है. सिरोही नस्ल की बकरी राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी पाई जाती है. वैसे इसका पालन अब भारत के अन्य हिस्सों में भी किया जाता है. सुरती बकरी भी बहुत फेमस है.

बकरी पालन के लिए कई बार सरकार भी पशु पालकों के हित में बात करती है. कुछ पशुपालन केवल गाय-भैंस तक ही सीमित रखते हैं, जबकि बकरियां भी एक महत्वपूर्ण पशुधन हैं. इससे कम लागत में अच्छी कमाई की जा सकती है. सिरोही नस्ल की बकरी-बकरा की मार्केट में काफी डिमांड है. ये बकरी एक बार में एक लीटर तक दूध देती है. आइये जानते हैं इनके बारे में.

ये है सिरोही बकरी की पहचान: इसकी पहचान की बात की जाए तो यह छोटे आकार का जानवर है. इसके शरीर का रंग भूरा होता है. वहीं शरीर पर हल्के या भूरे रंग के धब्बे भी देखने को मिलते हैं. कान इसके चपटे और लटके हुए होते हैं. जबकि सींग मुड़े हुए. बाल छोटे और मोटे होते हैं. मादा की लंबाई लगभग 62 सेमी तक होता है. ये दो बच्चों को जन्म देती है. नर सिरोही के शरीर की लंबाई लगभग 80 सेमी तक होती है.

सुरती बकरी: सुरती बकरियों में अधिकांश जानवरों में कोट का रंग (चमकदार सफेद), थूथन और त्वचा का रंग (गुलाबी) होता है. इन बकरियों के भूरे रंग के सींग और खुर होते हैं. गोल आकार के थन और लंबे शंक्वाकार थन (तालिका 1) के संबंध में विशिष्ट नस्ल की विशेषताएं हैं। बकरी एक दिन में 750 ग्राम से 1 लीटर तक दूध देती है.

महज पांच रुपये आता है खर्चा: छोटे और सीमांत किसानों के लिए सिरोही बकरी पालन जीविकोपार्जन के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है. क्योंकि इस बकरी पर हर दिन 4 से 5 रुपये का ही खर्च आता है और ये आसानी से पाली जा सकती है. ये बकरी मूल रूप से राजस्थान के सिरोही जिले की मानी गई है. यही वजह है कि इसी जिले के नाम पर इस नस्ल का नाम भी सिरोही पड़ गया है. इस नस्ल के बकरों के वजन की बात की जाए तो 50-60 किलो और बकरियों का का 30 किलो तक होता है.

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